खेलवना

भोजपुरी संस्कार गीतन में #खेलवना के बहुत महत्व बा। बालक भइला की खुसी में गावे जाएवाला #सोहर का बाद #खेलवना सबसे जिआदे गावल जाला। सोहर के जहाँ एगो निस्चित छन्द आ लय बा, उहें खेलवना गीतन में ई बन्हान नइखे। कवनो छन्द आ लय में पुरहर मस्ती से #खेलवना गावल जाला। #खेलवना अजबे आनन्ददायक मांगलिक गीत ह, जवना में बालक के रूप- रङग, उठल- बइठल, खेलल- कूदल, हँसल- रोवल, चाल- ढाल आ बाबा- इआ, माई- बाबूजी, भाई- भउजाई, चाचा- चाची के छलकत नेह- दुलार के बरनन होला। ए हिसाब से #तलसीदास जी के ठुमुकि चलत…

Read More

“पीपर के पतई ” नागपुर मे

अबकी बेर के यात्रा खूब सुखद रहे । एह यात्रा मे आपन किताब “पीपर के पतई” नागपुर में आदरणीय श्री नितिन जी गडकरी के अपने प्रिय श्री राम प्रकाश मिश्रा जी के संगे भेंट कइनी ।भेंट के संगे भोजपुरी भाषा के मान्यता ला चर्चा भइल ।

Read More