आपन बात

आजू के भागमभाग दौर में भोजपुरी के पत्र-पत्रिका चलावल कवनो खेल ना ह. आज जब पठनीयता कम भइल जात बा आ लोग आभासी दुनिया में आकंठ डूबल जा रहल बा एह बीचे आपन उहे आभासी मंच पर उपस्थिति दर्ज करावल उहो, नियमित रूप से कवनो ठठ्ठा बात ना कहल जाई. ‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ लगातार एह दिसाई आपन प्रासंगकिता बनवले बा. बहुत थोडके समय में बहुत साहित्यकार लोगन के एगो लमहर जमात खड़ा में जहवां उ सफल बा उहें रोज –ब- रोज नया कलमकार के देश-विदेश से खोजे में सफलो भइल…

Read More

आपन बात

भोजपुरी साहित्य सरिता क इ अंक आप लोगन के सौंपत के बहुत हर्ष होत बा। सबसे बड़ी खुशी क इ बात ह कि ई अवसर कार्तिक महिना के बा । कउनो राष्ट्र देश के सांस्कृतिक वैभव क परिचायक उहवां के लोक साहित्य होखेला। जवने से उहवां के संस्कार परंपरा जीवन आदर्श उत्सव विषाद नायक नायिका रितु गीत विवाह गीत भजन राजनीतिक सामाजिक धार्मिक गीतन के बोल में समाहित रहेला। वइसे तो हर देश के आपन एक परम्परा होखेला लेकिन हमरे देश के बात निराला बा। इहवा “कोस -कोस पर बदलें…

Read More

आपन बात

साहित्य के चउखट पर ठाढ़ ऊँट कवने करवट बइठ जाई , आज के जमाना मे बूझल तनि टेंढ ह । कब के टोनहिन नीयर भुनभुनाए लागी आ कब के टोटका मार के पराय जाई ,पते ना चले । आजु के जिनगी मे कवनों बात के ठीहा ठेकाना दमगर देखाई देही , भरोष से कहलों ना जा सके । एगो समय रहे जब मनई समूह मे रहत रहे , अलग समूह – अलग भाषा –बोली , रीत – नित सभे कुछ कबीला के हिसाब से रहे । ओह कबीलन मे अपने…

Read More