“माई माईए होखेले

“माई माईए होखेले , केतनहुं बड़ हो जा , कुछु क ल , भले जग काहे ना जीत ल लेकिन ओकर नज़र में तू बच्चा ही रहब, ओकर फिकर करे के आदत कबहुं ना जाला” :- रमेश इ सब बात सोचत-सोचत तेज़ी से घर के तरफ बढ़लन । रात के नौ बजत रहे आ उ अभी ले शहर में ही कवनो काम में उलझल रहलन । माई के फोन आइल रहे कहत रहली “आव घरे हम तोहार उपाय लगावतानी , तू नू साफा बिगड़ गईल बाड़ । भला हेतना रात…

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कोठेवालियाँ

रानी के बियाह क बड़ा.शोर ह बरात बलिया से आयील ह,दश दिन पहिलवै से टेंट तम्बू लगै शूरू हो गयल ,अरे होहि के चाहि आखिर तहसीलदार साहब क पहिली बेटी बिहल जात बा,दुआरे क रौनक त देखतै बनत बा।तहसीलदार साहब खूदै हर चीज क निगरानी करत हउए।खूटा गाड़े बदे बास चाहत ह ,उदया लगत बा किआज कुल बसवरिय काट घली,इ उदया सुसुरा तहसीलदार के देखैला चार पोरसा ऊपर चढ़ जाला।अउर आज त रमेशो (तहसीलदार क भाय)आवैके हउए।रमेश बहुत दिलदार मनयी हउए ,ओनके बारे मे का-का बतावै…जब उ पढ़ै जा ओनकर…

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पियSकड़वा यार

हमार गाँव के तीन यार रले। सुखन मियाँ,  रुबिन मियाँ , साधु पासवान। तीनो मे बहुत दोस्ती रहे। तीनो एके साथ ईटा पाथे चेमनी पर जा सन और एके साथे ईटा पाथ के चेमनी के पथेरी से वापस आवसन। अगर कवनों दोस्त के ईटा पाथे मे देरी हो जाए तS तीनो एक दुसरा के मदद कके जल्दी जल्दी एके साथे ईटा पाथ के चट्टी पर पहुँचत रले सन। जब तीनो यार चट्टी से वापस पैदल आवसन तS केहु माई के लाल ना रहे जे ऐ ई तीनो से बतीया लेव।…

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प्यार, परिवार, बोझ

देख सतीश तोरा के समझा दे तानी ते आज के बाद हमारा और हमारा मोहब्बत के बारे मे कुछ भी कहलीस तS हमारा से बुरा केहु ना होई। ई तेवर सोनु के देख के तS अजबे महसूस भईल हमनी सब मित्र सन के। ई बात तब के हS जब हम, मनीष, अमरजीत, इरसाद, दीपक, बिजेन्दर सब मित्र कालेज के प्रांगन मे बईठ के हँसी मजाक करत रनी सन। सतीस सोनु के गर्लफेंड के बारे मे मजाक कS देले रहे। ई बात पर सोनु सतीस से दु-तीन हफ्ता तक बात ना…

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अपनो हँसी

एगो गाँव में एगो बहुते पहुंचल साधु महाराज जी पधरलन । गाँव के सब लोग उनकरा के आपन आपन दुखरा सुनाए खातिन पहुंच गइल । कोई कहे बाबा जी हमर बेटवा के अइसने आशीर्वाद दिहि की हमार बेटा के सरकारी नौकरी लाग जाए ! कोई कहे महात्मा जी अइसन हमारा के आशीर्वाद दी ही की हमर घर में खाली पोता के ही किलकारी गूंजे । एगो बड़ी कमजोर बिमारी आह आदमी बाबा जी के पास आपन दुःखरा लेकर आइल कि बाबा जी हम त संयमित जीवन बितावइला फिरो रोगिए बानी…

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अबही समय लगी

आजकल रोग अउर बेमारी क आफर चलत बा एगो प दू फीरी लगत बा । सुगर देखावै जा थाईराइड भी निकलिए  जाई ।  ब्लडप्रेसर भी बढ़ल रहेला इहो बिकास क राह धईलs ।  समझ मे ना आवत बा ई शरीरी क का गत लिखल बा । जबकि हमने दरसन क बात ढेर कइल जाला , बतियावत मे त वैसहु कोई ना पायी लेकिन इ सच बा रोजै जीयै क मनसा बढ़त जाले । अस्पताल पहुँच के देखा त सगरी दुनिया बेमार ह। हमहूँ सोचली कि आज डाक्टर के तनि देखा…

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सामा चकवा लोक कथा

सामा चकवा क  ई लोक कथा भारतीय लोक मानस मे रचल बसल बा। एक भाई अपने बहिन बदे अपने बाप क बिरोध करेला अऊर ओके निर्दोष साबित कइके समाज के लोगन के एगो नेक सन्देस देला। आज जहाँ समाज मे रिस्ता  नाता बेमानी होत जात ह । ऊहा इ त्योहार क आजू के समय मे महत्व बढ. जाला। ई कहानी बा,  राजा कृष्न क बेटी साम्बवती रहनी। एक चुगुलखोर जाके राजा से कहेला कि सामवती एगो ऋषि के साथे गलत समबन्ध बनवले हई। राजा ओकरे बाती पर बिसवास कई लेनै।…

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