कुशिआरी

बिआह-समंध बड़ी टुनकाह चीझ ह जी! सुरुए से सइ-सइ बीपत। कबो नाइ मँझधार में नापता हो जाला त कबो कचारे में मरा जाला। ते प कुश काका जइसन करजिब्हा अदिमी गाँव में रहस त सरबनासे बूझीं। असहूँ कहल जाला कि जेकर खेत में कुशिआरी निपज जाय ओहि गिरहस्त के सात पुहुत तक अन्न के दरसन ना करि पइहें। नीसन शहतीर अस गाँव में लागल घुन रहे ककवा, जवन तरे-तरे पूरे गाँव के रेसा-रेसा भुरकुस क दिहले रहे। बतकटी, पिनुकाही, गरपराही, कुभाखन, चुगलर्इ, र्इ सभ अइसन ऐगुन-गिरोह रहीसँ जवन उनुका में…

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भुनेसर भाई के ठेकुआ

जिउतिया आवे से महिना भर पहिले से ठेकुआ के नाम जपत बाड़े भुनेसर भाई. काल जिउतिया त बित गईल लेकिन सोमेशर भौजाई एके ठेकुआ माने कि खाली ओठंधन से ही भेंट होखे देले बाड़ी भुनेसर भाई के. बाकी ढ़ेरे मनी ठेकुआ बना के सिकहर पर धर देले बाड़ी कि भोरे जेतना मन करी, खा लेम. भुनेसर भाई के रात कटले नईखे कटात कि कब भोर होखे आ ठेकुआ के भोज कईल जाव. उ आँख खोलत बाड़े तबो भा बंद करत बाड़े तबो आँखीं के सामने ठेकुए लउकत बा. हमरा लागत…

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बबुआ ला पिचकारी

रंग-बिरंग अबीर-गुलाल के दुकान लाईन से सजल रहे। लोग आपन लाईकन ला पिचकारी रंग के खरीदारी करत रहे। उहे बजार में एगो दस साल के छोट लाईका पीठ पर कबाड़ के बोरी टांगले दुकान सन के सामने से कई बार गुज़र चुकल रहे। कबाड़ बीनल त ओकर एगो बहाना रहे ऊ त मासूम आपन ललचाई नजर से पिचकारी और रंग-अबीर-गुलाल के देखत आवत जात रहे। मुंशी काका भी आपन दुकान पर बईठ के ई लाईका के देखात रले। अंत मे मुंशी काका से रहल ना गईल त ऊ पूछ बाईठले-…

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बोरसी

घर में नाया सामान के अइला पर पुरनका के पूछ घट जाला कबो कबो त खतमें हो जाला , कमो बेस घर परिवार आ हितइयो के ईहे हाल होला जइसे जीजा के अइला पर फूफा के पूछ कम हो जाला, बेटी के होते बहिन के पूछ घट जाला ,नात नतकुर के होते आजा आजी पर फोकस कम हो जाला । ठीक अइसहीं अनदेखी क सिकार बेचारी ‘बोरसी’ देवी भी भइल बाड़ी। हीटर आ ब्लोवर के अइला से बोरसी देवी घर से बहरे क दीहल गइली, एकाध जनी बचल बाड़ी त…

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“माई माईए होखेले

“माई माईए होखेले , केतनहुं बड़ हो जा , कुछु क ल , भले जग काहे ना जीत ल लेकिन ओकर नज़र में तू बच्चा ही रहब, ओकर फिकर करे के आदत कबहुं ना जाला” :- रमेश इ सब बात सोचत-सोचत तेज़ी से घर के तरफ बढ़लन । रात के नौ बजत रहे आ उ अभी ले शहर में ही कवनो काम में उलझल रहलन । माई के फोन आइल रहे कहत रहली “आव घरे हम तोहार उपाय लगावतानी , तू नू साफा बिगड़ गईल बाड़ । भला हेतना रात…

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कोठेवालियाँ

रानी के बियाह क बड़ा.शोर ह बरात बलिया से आयील ह,दश दिन पहिलवै से टेंट तम्बू लगै शूरू हो गयल ,अरे होहि के चाहि आखिर तहसीलदार साहब क पहिली बेटी बिहल जात बा,दुआरे क रौनक त देखतै बनत बा।तहसीलदार साहब खूदै हर चीज क निगरानी करत हउए।खूटा गाड़े बदे बास चाहत ह ,उदया लगत बा किआज कुल बसवरिय काट घली,इ उदया सुसुरा तहसीलदार के देखैला चार पोरसा ऊपर चढ़ जाला।अउर आज त रमेशो (तहसीलदार क भाय)आवैके हउए।रमेश बहुत दिलदार मनयी हउए ,ओनके बारे मे का-का बतावै…जब उ पढ़ै जा ओनकर…

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पियSकड़वा यार

हमार गाँव के तीन यार रले। सुखन मियाँ,  रुबिन मियाँ , साधु पासवान। तीनो मे बहुत दोस्ती रहे। तीनो एके साथ ईटा पाथे चेमनी पर जा सन और एके साथे ईटा पाथ के चेमनी के पथेरी से वापस आवसन। अगर कवनों दोस्त के ईटा पाथे मे देरी हो जाए तS तीनो एक दुसरा के मदद कके जल्दी जल्दी एके साथे ईटा पाथ के चट्टी पर पहुँचत रले सन। जब तीनो यार चट्टी से वापस पैदल आवसन तS केहु माई के लाल ना रहे जे ऐ ई तीनो से बतीया लेव।…

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प्यार, परिवार, बोझ

देख सतीश तोरा के समझा दे तानी ते आज के बाद हमारा और हमारा मोहब्बत के बारे मे कुछ भी कहलीस तS हमारा से बुरा केहु ना होई। ई तेवर सोनु के देख के तS अजबे महसूस भईल हमनी सब मित्र सन के। ई बात तब के हS जब हम, मनीष, अमरजीत, इरसाद, दीपक, बिजेन्दर सब मित्र कालेज के प्रांगन मे बईठ के हँसी मजाक करत रनी सन। सतीस सोनु के गर्लफेंड के बारे मे मजाक कS देले रहे। ई बात पर सोनु सतीस से दु-तीन हफ्ता तक बात ना…

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अपनो हँसी

एगो गाँव में एगो बहुते पहुंचल साधु महाराज जी पधरलन । गाँव के सब लोग उनकरा के आपन आपन दुखरा सुनाए खातिन पहुंच गइल । कोई कहे बाबा जी हमर बेटवा के अइसने आशीर्वाद दिहि की हमार बेटा के सरकारी नौकरी लाग जाए ! कोई कहे महात्मा जी अइसन हमारा के आशीर्वाद दी ही की हमर घर में खाली पोता के ही किलकारी गूंजे । एगो बड़ी कमजोर बिमारी आह आदमी बाबा जी के पास आपन दुःखरा लेकर आइल कि बाबा जी हम त संयमित जीवन बितावइला फिरो रोगिए बानी…

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अबही समय लगी

आजकल रोग अउर बेमारी क आफर चलत बा एगो प दू फीरी लगत बा । सुगर देखावै जा थाईराइड भी निकलिए  जाई ।  ब्लडप्रेसर भी बढ़ल रहेला इहो बिकास क राह धईलs ।  समझ मे ना आवत बा ई शरीरी क का गत लिखल बा । जबकि हमने दरसन क बात ढेर कइल जाला , बतियावत मे त वैसहु कोई ना पायी लेकिन इ सच बा रोजै जीयै क मनसा बढ़त जाले । अस्पताल पहुँच के देखा त सगरी दुनिया बेमार ह। हमहूँ सोचली कि आज डाक्टर के तनि देखा…

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