लोक गीत

न जा, न जा न जा न जा न विदेश हो सजन। अपने नदिया किनारे बाटै, खेत हो सजन।   तोहसे अलुवा बोवईबै- संघवा-संघवा निरईबै। तोहसे मर्चा बैठैईबै, संघवा-संघवा तोड़ैईबै। तोहै देबै हम खेतवा- खेमटाव हो सजन।   न जा,न जा न जा न जा न विदेश हो सजन।   न जा,न जा न जा- दिल्ली बम्बई, न जा रेनूकोट हो। खेतिया जो करबा रजऊ, होई लहालोट हो। मिली जाई गांधी छपवा कै, नोट हो सजन।   न जा,न जा न जा न जा न, विदेश हो सजन।   जब…

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अँगार जरो

अँगार जरो तहरा हिया नइखे जो प्यार हो अँगार जरो तहरा हिया।   ओहि रे अँगारवा में मान मद जरी जाए मन के घमंडवा के दससीस मरी जाए बरी जाए जड़-बनवा में बरम लुकार हो   जरे अंग अंग कि चढ़े रंग दोसरका एके गो देहिया के लोग ना हो फरका भले होखे दुश्मनवा जरि मरि खार हो   छल दम्भ भेद भाव मिली के मेटाव भाई भोजपुरिया हो मन के मिलाव जुगुत कइला पर बही उलटो जलधार हो। — केशव मोहन पाण्डेय —

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भोजपुरी गीत

जेकरा बुझाईल जइसन वइसन कहा गइल हाथी एगो अन्हरन के गांव में जब आ गइल ।। हार गइली अकिला फुआ त बुझे गइलन फूफा हथिया के कान छुअते कहे लगलन सूपा बुआ निहर उनके अकिले हेरा गइल हाथी एगो अन्हरन के गांव में जब आ गइल ।। थाक गइलन गब्बर सिंह तब अइलन शांभा हथिया के गोर छुहलन कहे लगलन खांभा थाह गब्बर, शांभा के एहिजन बुझा गइल हाथी एगो अन्हरन के गांव में जब आ गइल ।। मुखिया जी देखे अइनी ई का चमत्कार बा लागल जेकरा पीछे सगरो…

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माई अम्बें के जोत जगा के

माई अम्बें के जोत जगा के,नरियल आ फूलवा चढ़ा के )2 मइया शेरावाली के, मैया विन्ध्यावासनी के बार बार दुआर तोहरे, मैया हम आइब लाली चुनरिया माई, हम तोहके चढ़ाइब   अन्तरा- चढ़ते नवरात हे माई,दुआरे हम आइब फल–फूल,लडूवन के,माई भोगवा लगाईब)2 मैया थावेवाली के,मैया मैहरवाली के हम शीश झुकाइब लाली  चुनरिया माई, हम तोहके चढ़ाइब   माथे मुकुट शोभे, गले में शोभेला माला देख के रुपवा माई,धन धन लाल हो जाला बाघवा हुंकार भरे जब ,सगरी दुनिया डरेला माई तोहरे कीरपा से जग में सब काम टरेला   मइया शेरावाली…

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पल-पल जिनगी घूटे इहवाँ

हमें घूमा द गांव सैंया,रहब ना शहर में पल-पल जिनगी घूटे, इहवाँ रहब ना शहर में   गांव के माटी शहर से सुंदर,जहां पीपल के छांव बा। शहर के एसी महल से भईया,टूटही पलानी ठांव बा। फ्रीज से जहवाँ बढ़िया पानी, मिलेला नहर में पल-पल जिनगी घूटे इहवाँ, रहब ना शहर में   धुआ शोर से दूर रहब हम,हरियाली के बीच। बाग में कोयल कुहुके जहांवा,पपीहा गावे गीत।। चैन के निनिया लेहब हम, आठों रे पहर में पल-पल जिनगी घूटे इहवाँ, रहब ना शहर में   खेतवा में लहराइल बाली, झूमेला…

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कजरी

नीमिया गछिया प ढिलुहा लगाई द पिया सखियन के बोलाई द पिया ना।। ———————————————— पुरवा कइलस बेचैन देहिया बथे दिन रैन आव ढिलुहा लगा तु ढुलाई द पिया गरमी सुखाई द पिया ना।।१।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————– बड़ुए गोदिया में ललनावा गावसु सखी सभ गानावा तुहुं सखियन संग लईया मिलाई द पिया कजरी सुनाई द पिया ना।।२।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————– केशिया नागिन लेखा लहरे मुँह प आई आई के ठहरे केशिया बान्ह के तू जुड़ा बनाई द पिया सखियन के जराई द पिया ना।।३।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————— सईंया…

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सोहर

घर घर बाजेला बधइया, कि कृष्ण जी जनम लेले हो, अरे लाला मथुरा के दिनवा बहुरि गईले, नंद घरे सोहर हो।   धन्य धन्य बाबा बसुदेव, जे सब गुन आगर हो, अरे मईया धन-धन, देवकी दुलारी, जे जनली दामोदर हो।   पहिले पाहिल पांव परसेली, जमुना जुड़ा गईली हो, ललना मधुर मधुर, मुसुकईलन, मुरली मनोहर हो । संजय कुमार चतुर्वेदी

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बीरन अँगना (राखी क गीत)

पहिरब हरियर चुड़िया पीयर कँगना बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   ससुरा मे ननदो के करब दुलरवा भरब अकवारि करि उनके सिंगरवा भींग भींग जइहें उतरि नेह झरना ॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   लेइके असिसिया जइबे नइहरवा सुन लागि ससुरु के घरवा दुवरवा धरबs डहरिया लेई संग सजना॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   हाथ मे नेह माथे कुंकुम टिकवा आरती करब जइसे मोर सलिकवा जीयs मोर भइया सुख सपना॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   भउजी के सगवाँ मे करबि ठिठोली हँसि हँसि चहकब बोलि मीठी बोली…

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निर्गुन

नेहिया तोहार हउए सोनवा के गहना ललकी चदरिया उघार$ जन सजना सुखवा के निंदिया आइल बा पलकवा सुखवे के बोलिया में रूकता हलफवा सुखके मिलन बा चिक्कार$ जन सजना | सुसुकेला काहे केहू पिटेला हो छाती सेजिया प सुतल बानी बनी एहवाती मिले जालीं बाबा से बिचार$ जन सजना | जनम जे दिहल ओकर रिन रहल बाटे पानी में पियासल जीव मिन रहल बाटे हउए ना जुदाई हिया फार$ जन सजना | लोकवा के लाज रहे लजिया निभइलीं माया में भुलइलीं माया में लपटइलीं डोलिया हो चढ़ाई के उतार$ जन…

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कजरी

आरे रामा मगन बाड़े त्रिपुरारी, भोले भंडारी ए रामा … | गावे उमड़ी घुमड़ी के बदरिया खेले झिसी पच्चीसी फुहरिया रामा आरे रामा संगवा में गउरा मतारी, मगन…. | जल ढारे केहू बंम बोलेला केहू बेदना में कंठवा खोलेला रामा आरे रामा जिनगी के कहे लाचारी, मगन…. | टरे लागेला दुखवा पराला कवनो बांझिन के अँचरा भराला रामा आरे रामा अइला के देर बा दुआरी, मगन… | कवन कवन महातम गाईं जोगिया के आतम में बसाईं रामा आरे रामा भगति में टेरीं पुकारीं, मगन…. | विद्या शंकर विद्यार्थी

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