गीत

फाटि गइल खेत जइसे फूट-कंकरी असों फेर पड़े झूर झंखे गांव-नगरी। डांड़ पड़े खाद-बीया खेत के मजूरिया रेट-पोत टेकटर भाड़ा महसूलिया धान कहे कौन सूखे ज्वार-बजरी।असों0 आज के त नाहीं बाटे काल्ह के फिकिरिया बुचिया का संग के सहेली लरकोरिया कइसे होई जुटी कइसे डाल – दउरी ।असों0 आधा छोंड़ चउरा मे कुल्हिये इजतिया हीत-नात दसमी- देवाली डाला छठिया किस्त फेल बैंक मांगे लोन जबरी।असों0 –आनन्द संधिदूत

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मन उमगाइल

बहिना के बा मन उमगाइल, राखी के परवान भइया नेहिया से अनजान ॥ खोरी – खोरी बाटे डेराइल निनियो के बा चैन हेराइल गाँव शहर सुनसान बज़रिआ, सत्ता के अभिमान भइया नेहिया से अनजान ॥ बहिना के खोईंछा बा खाली रखिहा हमरे मुँहवा के लाली अन धन ना रूपिया चाही , दीहा नेह सनमान भइया नेहिया से अनजान ॥ सगुन दिनवा राह निहारेली नेह क डोर हथवे बान्हेली हहरि असीसिहें नइहरवा, रोजही साँझ बिहान भइया नेहिया से अनजान ॥ दुधही नहाया, पूतहीं फरिहा बहिना क थाती नेह सरिहरिहा तहरी किरती…

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छठी मईया गीत

छठी मईया सुनलिहीई अरजियाआऽऽ, करतनी निहोरा बारम्बार! केकरा से कहिई ऐ माई होऽऽ आपन करेजवा के दुःखवाऽऽ , तूहे त माई हऊ हमार !   रउवा द्वारे खड़ा बिया एगो बाझिन , खोली देहूँ न केवार ! देही दीही न एगो हमरो के लड्डु गोपाल होऽऽ हरीअर होजाईई कोखऽ हमार !   देखी ऐ छठी मईया तनवा मारी ..मारी , हमरा पे ई हँसेलाआऽ ई जग संसार ! सुनाऽऽ बांटे हमार अंगनाऽऽ सुखल बा अँचराआऽऽ , माई हमरो के कोई कहे , किलकारी से गूंजे हमरो दुवार !   हमहुं…

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भइया मलहवा रे

भइया मलहवा रे, कवने घटिया लागी नइया मोर।। नदिया अगम लागे, सघन सेवार आगे, भइया मलहवा रे, कतहीं ना लउकत बाटे छोर। भइया मलहवा रे, कवने घटिया लागी नइया मोर।। नाही गइनी पुरुब पछिम देखनी ना उतर-दखिन भइया मलहवा रे, असरा लागल बाटे तोर। भइया मलहवा रे, कवने घटिया लागी नइया मोर।। नदिया फुलाइल बिआ देखि-देखि काँपे हिया भइया मलहवा रे, घेरले अन्हरिया घनघोर। भइया मलहवा रे, कवने घटिया लागी नइया मोर।। रामपति रसिया सोई दिहनी समइया खोई भइया मलहवा रे, भइल चाहत बाटे भोर। भइया मलहवा रे, कवने घटिया…

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कहवाँ मोर दलान

मड़ई छान्ही घर बइठका, बसत रहल परान हेराइल कहवाँ मोर दलान ।   खर सेवर के बात बिहाने जाँतत तेल राखि सिरहाने माई खाति बबुआ हेरी, आपन सकल जहान हेराइल कहवाँ मोर दलान ।   गरमी जाड़ा भारी बरखा अचके भूलल गान्ही चरखा हरवाहन से भरल काहें नइखे मिलत सिवान हेराइल कहवाँ मोर दलान ।   बारी उजरल उकठल कटहर गाँव गली मे फइलल जहर चच्चा कक्का बुढ़वा दद्दा लउके नहीं मचान हेराइल कहवाँ मोर दलान ।   खटिया मचिया नइखे दुवरा खरिहाने कहवाँ बा पुवरा घर त बाँचल नाही…

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बरखा – राग

भींजि जाई गतरे -गतर आज धरती चुई ओरियानी ; हमरे सवाँग दूर देस जबून लगे पानी ! खुबे झकझोरि के ,बरिस देई बदरा तनिको जोगाई नाहीं,बहि जाई कजरा सँभरी ना हमसे ई चुवही -पलानी , जबून लगे पानी !   छछनल धरती क अतमा जुड़ाई बूने-बून निखरी सँवर सुघराई हमरा प’ बिजुरी देखाई मनमानी , जबून लगे पानी !   मछरी के सुख बा कि उमड़ल ताल हो हम त ,फिकिरिये में जागीं बेहाल हो धुअँवाँ से अँड़सल बा ,छोटकी चुहानी ,जबून लगे पानी !   सासजी के जर बा…

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गउआं के माटी

मुंबई  के ताज होटल जुहू चौपाटी सबका से नीमन बा गउआं के माटी|   धनवां के ढेरी जब लउके खरिहनवां बाबूजी के ओठवा खिलल मुसकनवां सरसो के फूलवा से महकल सिवनवा लगेला सुनाये तब फगुआ के तनवा   देखत उतान होइ गईल मोर छाती सबका से नीमन बा गउआं के माटी|   मन भावे बरम बाबा के चउतरवा भोरहीं अजान संगे गूंजे जयकरवा कहीं गूंजे मानस क दोहा चौपाई कहनीं सुनावे रोज रतिया के माई   चइता आ कजरी के बोल जहाँ खांटी सबका से नीमन बा गउआं के माटी|…

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कृष्ण जनम

जनम लिहले कन्हैया कि बाजेला बधाईया अँगनवा-दुअरिया नू हो। अरे माई, दुआरा पर नाचेला पँवरिया कि अइले दुखहरिया नू हो।। बिहसे ला सकल जहान कि अइले भगवान कि होई अब बिहान नू हो। अरे माई, हियरा में असरा बा जागल झुमेला नगरिया नू हो।। गरजि-चमकि मेघ बरसेले दरस के तरसेले मनवा में हरसे नू हो। अरे माई, जुग-जुग जियें नंदलाल कि आँखि के पुतरिया नू हो।। देखि के जमुना धधा गइली अउरी अगरा गइली कान्ह पर लुभइली नू हो। अरे माई, साँवरी सुरत मनभावन हटे ना नजरिया नू हो।।

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गांधी जी

आइल रहस गांधी जी भारत में संत बन के उनके परिश्रम से मुक्ति मिलल गोरन से विगुल बाजल आजादी के सहर आ गांवे-गांव केतना देले कुरबानी भइल भारत में नाव अइसन महात्मा से अंगरेज भी डर गइले आइल रहस गांधी जी …………. केतना गो नर नारी, गांधी के साथे अइले क्रांति के मसाल के अहिंसा से जलइले सदी में जे ना भइल, बरिस में करी गइले आइल रहस गांधी जी …………. चौरा-चौरा के घटना चाहे हो दांडी मार्च लंदन में गोलमेज हो चाहे बिहार मार्च सबका हीरो गांधी जी देखत-देखत…

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