कजरी

नीमिया गछिया प ढिलुहा लगाई द पिया सखियन के बोलाई द पिया ना।। ———————————————— पुरवा कइलस बेचैन देहिया बथे दिन रैन आव ढिलुहा लगा तु ढुलाई द पिया गरमी सुखाई द पिया ना।।१।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————– बड़ुए गोदिया में ललनावा गावसु सखी सभ गानावा तुहुं सखियन संग लईया मिलाई द पिया कजरी सुनाई द पिया ना।।२।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————– केशिया नागिन लेखा लहरे मुँह प आई आई के ठहरे केशिया बान्ह के तू जुड़ा बनाई द पिया सखियन के जराई द पिया ना।।३।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————— सईंया…

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सोहर

घर घर बाजेला बधइया, कि कृष्ण जी जनम लेले हो, अरे लाला मथुरा के दिनवा बहुरि गईले, नंद घरे सोहर हो।   धन्य धन्य बाबा बसुदेव, जे सब गुन आगर हो, अरे मईया धन-धन, देवकी दुलारी, जे जनली दामोदर हो।   पहिले पाहिल पांव परसेली, जमुना जुड़ा गईली हो, ललना मधुर मधुर, मुसुकईलन, मुरली मनोहर हो । संजय कुमार चतुर्वेदी

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बीरन अँगना (राखी क गीत)

पहिरब हरियर चुड़िया पीयर कँगना बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   ससुरा मे ननदो के करब दुलरवा भरब अकवारि करि उनके सिंगरवा भींग भींग जइहें उतरि नेह झरना ॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   लेइके असिसिया जइबे नइहरवा सुन लागि ससुरु के घरवा दुवरवा धरबs डहरिया लेई संग सजना॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   हाथ मे नेह माथे कुंकुम टिकवा आरती करब जइसे मोर सलिकवा जीयs मोर भइया सुख सपना॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   भउजी के सगवाँ मे करबि ठिठोली हँसि हँसि चहकब बोलि मीठी बोली…

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निर्गुन

नेहिया तोहार हउए सोनवा के गहना ललकी चदरिया उघार$ जन सजना सुखवा के निंदिया आइल बा पलकवा सुखवे के बोलिया में रूकता हलफवा सुखके मिलन बा चिक्कार$ जन सजना | सुसुकेला काहे केहू पिटेला हो छाती सेजिया प सुतल बानी बनी एहवाती मिले जालीं बाबा से बिचार$ जन सजना | जनम जे दिहल ओकर रिन रहल बाटे पानी में पियासल जीव मिन रहल बाटे हउए ना जुदाई हिया फार$ जन सजना | लोकवा के लाज रहे लजिया निभइलीं माया में भुलइलीं माया में लपटइलीं डोलिया हो चढ़ाई के उतार$ जन…

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कजरी

आरे रामा मगन बाड़े त्रिपुरारी, भोले भंडारी ए रामा … | गावे उमड़ी घुमड़ी के बदरिया खेले झिसी पच्चीसी फुहरिया रामा आरे रामा संगवा में गउरा मतारी, मगन…. | जल ढारे केहू बंम बोलेला केहू बेदना में कंठवा खोलेला रामा आरे रामा जिनगी के कहे लाचारी, मगन…. | टरे लागेला दुखवा पराला कवनो बांझिन के अँचरा भराला रामा आरे रामा अइला के देर बा दुआरी, मगन… | कवन कवन महातम गाईं जोगिया के आतम में बसाईं रामा आरे रामा भगति में टेरीं पुकारीं, मगन…. | विद्या शंकर विद्यार्थी

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मड़ई

उड़े जिन आन्ही में पकड़ले बानी मड़ई दइबो हँसत होई देख ई दबंगई। उड़े— मड़ई उड़त हम धइ के बचवलीं जिनगी धरब कइसे उड़े जइसे पतई। हवा पानी अगिया से केतना लड़ब हम मड़ई का संगही उड़त देखीं मनई। मड़ई जगत उपलब्धि हउए अपनी मुअतो का बेर न छोड़त बने मड़ई । आनन्द संधिदूत

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विरह गीत

आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले पिया अचके समुंदर के झाग भइले का बताईं कि केतना दरद बाटे दिल लागे सूना सजनवा के बिना महफ़िल कब उचरिहें बँडेरी के काग भइले आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले पिया अचके समुंदर के झाग भइले ।। काहें कइलऽ कपट तू कन्हैया कहऽ काहें मनवा चोराके भोरवले रहऽ राग मधुबन के काहें विराग भइले आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले पिया अचके समुंदर के झाग भइले ।। कहिया अइब बता दऽ तिथि वार दिन लेके आइब सुगंधित सुमन बिन-बिन हिया आवन के असरे…

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गीत

डार बिछुरल पतई कहली हमहुं त डार के लगहीं रहली। झोंका हवा के भुइयां पटकलस फेर जहवाँ ले गइलस गईली।। ना हमरो आपन केहु बा ना हम बानी कुछहु अपने संउसे डार गिरत बेरिया फूल-पतई देखत रही गईली।। एहन ओहन खूब घुमवलस तोड़ मचोड़ के टुकड़ा कइलस। फेर उड़ा के छितर-बितर करी लेई जा के गंगा में धइली।। गंगा हमके बहा ले गईली जा सागर से भेंट करइली सागर माथा लगहीं देखली देखी निहोरा उनका कइली।। एगो ढेला कतहीं से अइलस हमरा के उ गले लगइलस। टान-टून के पार उतरलस…

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मजदूर दिवस के कइसे देहिं बधाई

निक मजूरी के चलते छूठ गईल गउवाँ । हित नात कुल छूटल भूलाइल पुरखन के नऊवां ।। गावँ के बनिहार के, शहर मजूर बनवलस । निक मजूरी भेटाई इहे हँस के बतवलस ।। काम क घंटा यहां तय बा ये भाई । चाहे तपे सुरुज चाहे चले हवा हरजाई ।। होते सबेर लोगवा कारखाना और धऊरता । सपना होइ पूरा सोच आस के फुलवा मऊरता ।। बचवन के निक शिक्षा भेटाई । गरीबी के नाँव ई शिक्षा ही मिटाई ।। दवाई किनाई जवन माई के जिनगी बढ़ाई । बाबू के…

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मजदूर दिवस

बनी गईलन मजदूर हो जब भइलन सनेहिया से दूर हो। चिरई बोले से पहीले काम निपटा के चली भइले खेतवा के ओर हो।।जब……….।। चार रोटी संगे बाटे मिरिचा पियाज हो, कालह तरकारी बनीं लागल मन में आस हो, खेतवा के देखी-देखी चमकेला अँखिया के लोर हो।।जब……………।। लइकन के चहक से मनवा बिहसेला सगरी थकान तनिके में भाग जायेला इनके से बाटे सारा जिनगी अंजोर हो।। जब…………।। छोटकी मड़ईया महल अस लागे मेहरी के बतिया कोयल जस लागे बंधल बा पीरितिया के डोर हो ।।जब…………।। खुरपी-कुदाल हऊवे इनकर संगतिया रतिया ना…

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