जिनिगी के खेवईया

गते गते बितता समइया हो रमइया कहिया कहब बबुआ जिनिगी के उहे बा खेवईया हो रमइया कहिया कहब बबुआ ।। गोदिया में जननी के सरग समाइल अंगुरी के पोर रोज रोज पकड़ाइल बाबूजी से बड़ ना सहईया हो रमइया कहिया कहब बबुआ ।। जाहि दिन मेहरी से तन लटपटाइल ओही दिन जिनिगी के मकसद बुझाइल खुश भइले सृष्टि के रचईया हो रमइया कहिया कहब बबुआ ।। आव ए सुभाष आस तोहरे बा लागल बोल बतियाव तनि बनल बानी पागल हाथ जोर कहेले कन्हईया हो रमइया कहिया कहब बबुआ ।। गते…

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सब बदल गईल बा

हर लोग बदल गईल बा व्यवहार बदल गईल बा, नईखे बांचल मेलमिलाप हर राज बदल गईल बा।। धोखा से भरल हर रास्ता छल से भरल हर रात, अन्हार लउके दिन में अंजोर भईल हर रात।। हर शब्द बिखर गईल बा हर छन्द बिखर गईल बा, कतहीं मेल ना लउके यार हर गीत बदल गईल बा।। खान बदलल पान बदलल रहे के दलान बदल गईल बा, मान बदलल जहान बदलल सब अरमान बदल गईल बा।। नीति बदल गईल बा राजनीति बदल गईल बा, आंगन के स्वरुप बदलल बाबू के जोड़ल भीत…

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नन्हका के संगे

अगिली में पछिली में बरखा में बिछिली में बनल जाव बचना , नन्हका के संगे ।।   बबुआ दुलारे में कजरा लिलारे में खनक गइल कंगना , नन्हका के संगे ।।   कबों जाला मुसकाय फेर धूरि सउनाय सजल मोर अंगना, नन्हका के संगे ।।   बेर बेर दुलराय आइ गरे लिपटाय सफल ईस रचना , नन्हका के संगे ।। झूमल मोर सजना , नन्हका के संगे ।।   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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खोरी मे

हिन्दी हिन्दी उहो क़हत हौ हिन्दी गाई खोरी मे । कबले बनी राष्ट्र के भाषा कबों सुनाई खोरी मे ॥ भाषा विकास के कूल्हि रूपिया भेंट चढ़ाईं खोरी मे ॥ हिन्दी ला बस काम करी ना बात बनाई खोरी मे ॥ उत्तर से दक्खिन के जतरा घूम रहल बा खोरी मे । पोता रहल बा करिखा सगरों फेसबुकियाई खोरी मे ॥ आपन काम बनावे खातिर बात बनाई खोरी मे । झूठ मूठ के करिया उज्जर मत फैलाईं खोरी मे । मलाई वाली कुरसी खातिर गैंग बनाई खोरी मे । थेथरई…

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देश हित खातिर कर्तव्य

देश जोड़े वाला देश हित में बात करिंजा। नाही धरम धरम नाही जात-पात करिंजा । देश जोड़े वाला देश भारत के सपूत सबे भारत के जवान बा हिन्दू ,सिक्ख ,इसाई चाहे कवनो मुसलमान बा भारत बढ़े खूबे मेहनत, दिन -रात करिंजा देश जोड़े वाला देश सब बा भारतवासी अलगा अलगा जिम्मेवारी बा शिक्षक शिक्षा दान फौजी खातिर देश रखवारी बा आपन संगे अपने से ना ,घात करिंजा देश जोड़े वाला देश घर के मेहरारू घर के ले ली जिम्मेवरिया आऽपन कर्तव्य खूबे बूझे नाऊ बरिया आगे बढ़े वाला बढ़े ,ना…

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डिस्को पंडित के नामकरण

सन १९८४ में जब राम नगीना मिसिर के बड़का लईका के बियाह ठनाईल त मिसराइन न्योतली मोहल्ला के पड़ाइन शुक्लाइन डाक्टराईन ठकुराईन गडाईन तिवराईन दुबाईन गुप्ताईन इंजीनियाराईन अउरि मालिक के दफ़्तर के हेड क्लर्क लालबिहारी मिसिर के मेहरारू लक्ष्मी के   २४ बरीस के होखलें दुन्नो मिसराइन के लईका बाकिर लक्ष्मी के लईका पप्पू के बियाहे में रघुवीर जाने अबेर भईल सकल से चकोर चित्त से पानी चरित्र से राम लक्ष्मी के छोट लईका बी.ए के पढ़ाई छोड़ दिहलें अउर सरकारी नोकरी नाहीं सपरल त करे लगलें पंडिताई बाऊजी के…

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चलत गइनी

रस्ता चले के रहल चलत गइनी अउरी मिलल जे मिलत गइनी। हिय मिलल मिलल जियरा कि जियत गइनी कि मुअत गइनी। मिलल जे मिलबे कइल कि साथ सभकर छोडत गइनी। जे मिली संगे ऊ चलबे करी सोचि के हम उडत गइनी। बाकिर काहाँ होला अइसन कि अइसहीं हम सियत गइनी। जे साथ बा कबो जइबे करी इहे जिनगी भर कहत गइनी। कि साथे काहाँ सभ केहू चले सोचि हर मोड छोडत गइनी।    राजीव उपाध्याय   

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नोटबंदी

भइल नोटबंदी भइल नोटबंदी इ गरवा के हड्डी भइल नोटबंदी   खबर जइसे आइल मचल बाटे हल्ला आ बैंके के नीचे जुटल बा मोहल्ला मरद मेहरारू आ हम आउर रुऊआ लगल सब निकाले आपन पान सऊवा त बिहने से लल्लन लगा लिहलें लाइन आ गड्डी क रुपिया ले अइलीं पड़ाइन आ सोचलस सभै कि लगा लीहिं छक्का त होखे लगल रोज धक्का पे धक्का लाइन में लग के लगल लोग बोले कि चोरवन क मोदिया बिगड़ले बा ठंडी ॥ भइल नोटबंदी…………………..   दुखा गइलें भइया,दुखा गइलीं भउजी दुखा गइलें उहो…

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ई जिनगी भइल ज्वार बा

समझ ना आवे का कहीं, ई जिनगी भइल ज्वार बा। आजो ई तन तंदरुस्त बा, बाकिर मन भइल बेमार बा। चारो ओर मचल कोलाहल, शांति सौहार्द नजर ना आवे। भाईचार गइल बा तेल बेचे, सब कोई असहीं दिल मिलावे। नेह ना मिले स्नेह ना मिले, ना मिले केहु से मन। सब कोई प्यार तबे देखावे, जब लउके पाले धन। हाय विधना ई का होत बा, जे बोवे ऊ ना काटे। दुनिया खातिर धरम देखावे, भाई भाई आपस मे बांटे। ना रहल अब भाईचार, ना केहु के अब प्यार बा। समझ…

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कुछ मुक्तक

गुलाब के खुशबू के तरे रसल बा केहु , नेह नहाइल नयनन मे बसल बा केहु, दिल के धड़कन धड़क ई कहत बा – हमके याद कर के दूर हंसल बा केहु।   हमार दिल के दरवाजा खटखटावल केहु, हमार फोटो आज सिना से सटावल केहु, हमार प्यार ह पूजा पावन गंगा पानी जस बिना मिलले हमे प्रेम रस में पटावल केहु।   अब आँखिन उनकर राह निहारत बानी, दिल के दुआर उनका बदे बहारत बानी, बार बार सिना से सरकत बा ओढ़नी केहु उनका सिवा देखे ना सम्हारत बानी।…

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