दोहा

हम त सतभाखी सखी,भनू पियरवा मोर । बतबल से गिरगिट हने,गावाँगाईं शोर।   मोर मरदवा बाँकुरा,नाँघल सरग पताल। सबद-पाश से बान्हि के कस में कइले काल।   भूसा भरल कपार में,पिंगिल पढ़ल भतार। गलथन अइसन जिंदगी समुझल ना करतार।   धइ दे खिचड़ी सामने फिन सझुरा दे मोंछ। बिजना झल घरुआरिनी हे ले हेने अँगोछ। दिनेश पाण्डेय             पटना

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गँठजोर

आवऽ हो गँठजोरि बनाईं तू उठिसुति हमरे गुन गइहऽ, हमहूँ तहरो नाल बजाईं।   सबद धेनु के बाड़ उजारीं पोंछ उमेठ पूठ टिटिकारीं पोट पोसुआ करिया कूकुर परपिछाड़ पाछे लिलकारीं।   आरी करही फानसि हरही ढील पगहिया बिरहा गाईं।   आपन मथ-घट रख बिछलहरी तर भुस, कींचड़-गोबर बहरी जिन जन अइहें पाँक सनइहें पाँजर ढीला मग्ज फुटहरी।   रचि रचि पारि कुभाखर आखर खुद के पीठ खुदे सुहुराईं। दिनेश पाण्डेय               पटना

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मी टू के बात

मी टू के बात चलल सगरों तोपल बात उघारल जाई। काटि चिकोटी कहीं पुचुकार गाल बजाइ संभारल जाई ॥   नेता नपल अभिनेता नपल संग नपल कविता कविताई। लेख सुलेख आलेख क बाति भाँतिs भाँति बतावल जाई॥   मंत्री संत्री डीयम सीयम कब्र से मुअल निकालल जाई सबके करनी के गीत सुभीत ढ़ोल बजाय सुनावल जाई॥   नेह क गीत कढ़ावल गावल लोग इहाँ भरमावल जाई। आँखि मे लोर बचल कहवाँ बाचल बाति सुनावल जाई।   प्रीत गढ़े केहू रीत गढ़े गढ़ल गाढ़ देखावल जाई। जब सूनि भइल मड़ई बखरी…

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65 के बात बा

ताव बा मोछिया प छाती उतान बा, चले जब रहिया में भुईया हिलत सरकार बा, साचो के लागे इ उमिर काच बा ढेर नाही अभियो 65 के बात बा । नजर जब उठावे त रहिया होला खाली, रस भरल इनकर मीठ मीठ बोली, मनमोहक बाटे इनकर अंदाज हो ढेर नाही अभियो 65 के बात बा। दांते से छिले ले उखिया बरियार हो ठेहुन से तुरे ले उखिया दुटुक हो, रुनियो चबाले बरियार दांत से पट पट तुरेले अखरोठ दांत से, उमिर काच बा खाली 65 के बात बा । ऊपर…

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अपने से अपने लोग हारेला हो

भरोशा ना करिह केहू पs कबो, बीच रहियें में जान लोग मारेला हो। बन के आपन देखा के मासूमियत, करेला घात दुश्मनी काढ़ेला हो। कुदरत के लिखल लेख केहू मिटा ना सके, ना त केहू ओकरा के टारेला हो। होनी होके रही लाख कोशिश कलs, अनहोनी से काहें लोग डरेला हो। कहें के सभ आपन केहू आपन ना होला, बोले के बड़ बड़ मुँह फारेला हो। एतने ले पेयार मोहब्बत रह गईल बा, मरला के बाद माँटी में गाड़ेला हो। देखत रहेला लोग हँवा के रोख, तबे बुतल दिया के…

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देखत होई लो राँह

केतना खुशी भइल होई मन में जवना के नइखे थाँह। हमनिन   के   तारे  आवतारे   देखत  होई   लो   राँह।। केहू  के नाती केहू के लइका केहु के  ससुर केहू  के  बाप। मुक्ति दिलावे चलल बाड़े ओ लो का नाँव के करत जाप।। देखत होई लो उपर से कहत होई लो वाह………. व्याकुलता के सीमा ना होई होई लो बेचैन। जले जल दिहल ना जाई ली  लो नाही चैन।। जल मिलते आत्मा तृप्त हो जाई  पितरन के पूरा होईचाँह……… एक जगही पs होई लो नाही  घुमत होई…

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कुछु पुछीं मत ए सर जी

हमरा पढ़े लिखे ना आवे ना आवेला गावे बजावे। रोजे इसकूल प आईना हम आपन भूख मिटावे। देखि रावा के जानीं हम डर जी कुछु पुछीं मत ए सर जी हम बानीं काँच उमर जी। भईंस धोइना घरवा बकरी हम चराईंना। सानी पानी करीं हमीं गोबरो मुत उठाईना। माईये बाबुये घोरेले जहर जी कुछु पुछीं मत ए सर जी हम बानीं काँच उमर जी। कहे ले लो क़िताब भोजन छात्रवृत्ति ड्रेस भेटाई। पढ़बे भा ना पढ़बे बाकी होई कुछ कमाई। माई बाबु के अतने फिकर जी कुछु पुछीं मत ए…

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आइल चुनाव

जंगल मे हड़कम मच गइल सबही अचानक साधू भइल दुआ बंदगी हाथ जोड़ी के सब लोगन के शीश झुकउल घूम घूम के सब जंगल मे लागल करय जुड़ाव……. ऐ बबुआ लागता कि आइल चुनाव शेर करय खरगोश से यारी बिल्ली चुहन के महतारी साँप नेवला गठबंधन कय पड़ल हर जुगाड़ पे भारी के, केकरा के देई पटकनी सोचत बा ऊदबिलाव….. ऐ बबुआ लागत कि आइल चुनाव मोर के सँग सियार है नाचत तेंदुआ बकरी के फुसिलावत मगरमच्छ बानर मिलकर के थल, जलचर में सेंध लगावत मछली कछुआ बन्द अब करिह…

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जिउतिया

जिउतिया    से     बड   कवनो,   माई   व्रत     ना    जानेली। लमहर उमरिया खातिर करsस, एतना लइकन के  मानेली।। बिना   खईले   पियले ,  रहेली   उपवास। ओह माई के कबहू, ना टूटे के चाही आश।। सतपुतिया के सब्जी खाली,मडुवा के  उ रोटी। नोनी के उ साग बनावस, कईसहु जाली घोटी।। सतपुतिया के पतई पs, खाना देली चिल्हो सियारो के । फेड पs राखस भा छत के ऊपर,ई करत रहेली कारो के ।। जिउतिया के  जीवित्पुत्रिका के, नॉव से भी जानल जाला हो।…

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इंद्रदेव ना पारस झांकी

ना कतहुँ बा,बरसत पानी बूँद बूँद के तरसे प्राणी। ताल तलईया पोखर सूखल बा अकाल सब रहींहें भुखल। चंवरा में बा परल दरार धनक गईल सब खर्ह पतवार। तेज घाम से मन मछिआला छेंहर खातिर सब छिछिआला। कौआ मैनी मोर तरासल गौरइयन के झुण्ड पियासल। चातक के बा अकिल हेराईल झींगुर दादुर बा भकुआईल। करिया घटा मचावे शोर बदरी देख,ना नाचे मोर। गईल आषाढ़,पांच दिन बाकी इंद्रदेव ना पारस झांकी। डा.सुनील कुमार उपाध्याय प्रोफ.कॉलोनी,मनोहरपुर कछुआरा पटना-800016@****

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