“चिठ्ठी”

“Ravi sir, there is a letter for you” “रवि सर, तहरा खातिर चिठ्ठी बा” कहत चपरासी रवि के सेक्शन में दाखिल भईल। चिठ्ठी के नाम सुन जेतना अचरज रवि के भईल ओतने उनके सहकर्मी कुल के। आजु के जमाना में भी चिठ्ठी भेजे ला केहू। रवि के भी निमन से याद रहे कि बरसो से उनका के केहू चिठ्ठी नईखे भेजले। चपरासी के हाथ में चिठ्ठी के लम्बाई से देख के ही उ समझ गईले कि इ विदेशी चिठ्ठी ह अउरी हाथ में लेते ही ओयिपर मोट लिखावट से उनका…

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नन्हकी के माई

आज भोरही से मड़इया में  खुबे आवाजाही  लागल बा। नन्हकी के माई आज अकवार से बाहर निकल जात बिया। बड़की चाची  जब खिसियास त उ घरी तनी घुघटा के  सरका के कहस- ए अम्मा!  बहरिया कोई ना रहल ह। आ नन्हकी के कबे से कहतानी सुनते नईखे।त हाली हाली निपटारा करे खातिर …………. एतने में – ‘अच्छा ठीक बा। जा घरे ‘बड़की चाची के  ऐलान सुनते भीतर चल गईली। ए नन्हकी ! सुन ! साबुन से  बढिया से मुँह धोके पउडरवा तनी लगा लीहे। अबकी तोर मुँहवा साफा लागता ।…

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बेटी के भाग

गोधन कुटा गईल रहे,लोग बियाह-शादी के रिश्ता खातिर आवे-जाय लागल रहे।रघुनाथ के भी आपन बेटी के हाथ पियर करे के रहे।एगो सेयान बेटी के बप के आँख में नींद कहाँ लागे।रगुनाथ के दिन-रात इहे चिंता सतावे, “आखिर उ रेशमा के बियाह कईसे करीहें? ” “कहाँ से ले अईहें दहेज के पईसा?” “बिना दहेज,के करी रेशमा से बियाह?” एगो जे बेटा रहले चार साल पहिले कालकात्ता सड़क दुर्घटना में चल बसले आ मेहरारू त पहिलहीं दुनिया त्याग दिहले रहली। बाकी जात-जात कह गईल रहली, “रेशमा के बियाह निमना घर मे करेम”…

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बेटा बेचा गइल

समधी जी हम रउआ गोड़ पो पगरी राखत बानी हमरा बेटी के अपना लिहीं , भोला हाथ जोड़के अपना होखेवाला समधी के आगे गिड़गिड़ाये लगलन। देखीं हमरा के समधी मत कहीं अभी शादी नईखे भइल त इ नाता कइसन दीनदयाल रोब में बोललन।फिर हाथ जोड़के भोला कहलन , शदिया तऽ होइये नु जाई राउर कृपा के खाली जरूरत बा।देखीं जवन तय बा तवन तिलक चढ़े से पहिले किलियर कर दिहीं हम कहाँ कहत बानी कि शादी ना होई दीनदयाल कहलन। देखीं हम बहुत फेरा में अभी बानी पइसा के कवनो इंतजाम…

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संघतिया

“काजी शादी में कवनो पुरान गर्लफ्रेंड अवतारी का , जे एतना सज तानी ? अतना त दूल्हा भी ना सवरीहे।” संजय के श्रीमती जी, टीबोली बोलली  ।  उ अपना बाल के डाई करत रहले। सबेरे से ही अपना साज सज्जा पर भिडल रहले। “हम शादी में ना जाएब। ” संजय कहले। “काहे के भरमावतानी। शादी में ना जाएब , फिर एतना श्रृंगार काहे करतानी ?” श्रीमती जी उनका बात के मजाक समझ के पूछलि। “आज ऑफिस में जरूरी मीटिंग बा। ” “मीटिंग और संडे के ? पहिले त कभी ना…

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बड़की माई

ए बबुआ काल्ह जवन बाजारी से चीनी ले आइल रहस नु ओहमें हतना कम बा , बड़की माई तपेसर के हाथ में एगो झिटिका पकड़ा के कहली । बड़की माई त का सोचतारू हम चिनिया खा गइल बानी , अरे ना रे मटिलागाना बनिया नु डंडी मरले बा जाके ओकरा से देखइहे आगे से बरोबर दीही। आ फिर ओसहीं हो जाई त का करबु । ना नु होई ओकरा से लेबे से पहिले इयाद दिला दिहे कि पिछला बेर कम देले रह एह बेर ठीक से जोखिह । फिर दोसरा…

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