शेष भगवान जाने ——-!!

का जमाना आ गयो भाया, टँगरी खींचे के फेरा में ढेर लोग अझुराइल बाड़ें। उहो काहें बदे, एकर पता नइखे, बस खींचे के बा, सरेखल बा लोग आ आँख मून के खींच रहल बा। आगु चलिके एकर का फायदा भा नोकसान होखी, एकरा ला सोच नइखे पावत। आला कमान के कहनाम बा, सेकुलर दादा कहले बाड़ें, एही सब के चलते हो रहल बा। अब भलही टँगरी खींचे के फेरा मे खुदे गड़हा गिर के कनई मे लसराए के परत होखे। ओहमे कवन सुख मिल रहल बा भा आगु मिली,पता नइखे।…

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लाल विहारी लाल के लोक गीत आ छठ गीत के शूटिंग भइल

नई दिल्ली। कवि,लेखक,पत्रकार आ समाजसेवी लाल बिहारी लाल के 4 गो लोक गीत आ तीन गो छठ गीत के शूटिंग प्रज्ञा म्यूजिक कंपनी खातिर कक्ड़ फार्महाउस में भइल जेकर निर्देशक पी. कृष्णा हवे, जेमें स्वर देहले बानी सुपर स्टार लोक गायक राधे श्याम रसिया,हीरा पाठक,पूनमपांडे और अमित मिश्रा आ संध्या संगम। एकर बोल बा- हमरा सक लागता,गर्दा उड़ावेलू, मेरी जान सोना,जान हाजिर बा, हे छठी मईया रखिह सेनुरवा के लाज, बहंगी लचकत जाये, बढ़ गइल महंगाई हो छठी मईया । ई सब गीत प्रज्ञा म्यूजिक कंपनी प्रा. लि.कंपनी से रिलीज होई।अमित मिश्रा…

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लोक गीत

न जा, न जा न जा न जा न विदेश हो सजन। अपने नदिया किनारे बाटै, खेत हो सजन।   तोहसे अलुवा बोवईबै- संघवा-संघवा निरईबै। तोहसे मर्चा बैठैईबै, संघवा-संघवा तोड़ैईबै। तोहै देबै हम खेतवा- खेमटाव हो सजन।   न जा,न जा न जा न जा न विदेश हो सजन।   न जा,न जा न जा- दिल्ली बम्बई, न जा रेनूकोट हो। खेतिया जो करबा रजऊ, होई लहालोट हो। मिली जाई गांधी छपवा कै, नोट हो सजन।   न जा,न जा न जा न जा न, विदेश हो सजन।   जब…

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मोबाइल

ए भाई! चलऽ घरे। माई के तबियत खराब बा।’- मोबाइल पर कुछ लिखत चमन से उनुके छोट भाई अमन कहलें। ‘त का हो गइल? तबियत त केहू के खराब होला। बाबूजी बड़लें बाड़ें, कहि दS दवाई ले आ देसु।- मोबाइल पर आँखि धसवले चमन कहलें। ‘आरे, तबियत जोर से खराब बा। बाबूजी रोवत रहलें हँ। तू जल्दी चलऽ।’- अमन कहलें। ‘अब जइबऽ कि कसि दीं, दू चटकन? तबियत खराब बा त डाकडर बोला ल सन। हम जा के का करबि?’- चमन तनिका सा मोबाइल पर से नजर हटाके अमन पर…

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दोहा

हम त सतभाखी सखी,भनू पियरवा मोर । बतबल से गिरगिट हने,गावाँगाईं शोर।   मोर मरदवा बाँकुरा,नाँघल सरग पताल। सबद-पाश से बान्हि के कस में कइले काल।   भूसा भरल कपार में,पिंगिल पढ़ल भतार। गलथन अइसन जिंदगी समुझल ना करतार।   धइ दे खिचड़ी सामने फिन सझुरा दे मोंछ। बिजना झल घरुआरिनी हे ले हेने अँगोछ। दिनेश पाण्डेय             पटना

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अँगार जरो

अँगार जरो तहरा हिया नइखे जो प्यार हो अँगार जरो तहरा हिया।   ओहि रे अँगारवा में मान मद जरी जाए मन के घमंडवा के दससीस मरी जाए बरी जाए जड़-बनवा में बरम लुकार हो   जरे अंग अंग कि चढ़े रंग दोसरका एके गो देहिया के लोग ना हो फरका भले होखे दुश्मनवा जरि मरि खार हो   छल दम्भ भेद भाव मिली के मेटाव भाई भोजपुरिया हो मन के मिलाव जुगुत कइला पर बही उलटो जलधार हो। — केशव मोहन पाण्डेय —

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गँठजोर

आवऽ हो गँठजोरि बनाईं तू उठिसुति हमरे गुन गइहऽ, हमहूँ तहरो नाल बजाईं।   सबद धेनु के बाड़ उजारीं पोंछ उमेठ पूठ टिटिकारीं पोट पोसुआ करिया कूकुर परपिछाड़ पाछे लिलकारीं।   आरी करही फानसि हरही ढील पगहिया बिरहा गाईं।   आपन मथ-घट रख बिछलहरी तर भुस, कींचड़-गोबर बहरी जिन जन अइहें पाँक सनइहें पाँजर ढीला मग्ज फुटहरी।   रचि रचि पारि कुभाखर आखर खुद के पीठ खुदे सुहुराईं। दिनेश पाण्डेय               पटना

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मी टू के बात

मी टू के बात चलल सगरों तोपल बात उघारल जाई। काटि चिकोटी कहीं पुचुकार गाल बजाइ संभारल जाई ॥   नेता नपल अभिनेता नपल संग नपल कविता कविताई। लेख सुलेख आलेख क बाति भाँतिs भाँति बतावल जाई॥   मंत्री संत्री डीयम सीयम कब्र से मुअल निकालल जाई सबके करनी के गीत सुभीत ढ़ोल बजाय सुनावल जाई॥   नेह क गीत कढ़ावल गावल लोग इहाँ भरमावल जाई। आँखि मे लोर बचल कहवाँ बाचल बाति सुनावल जाई।   प्रीत गढ़े केहू रीत गढ़े गढ़ल गाढ़ देखावल जाई। जब सूनि भइल मड़ई बखरी…

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भोजपुरी गीत

जेकरा बुझाईल जइसन वइसन कहा गइल हाथी एगो अन्हरन के गांव में जब आ गइल ।। हार गइली अकिला फुआ त बुझे गइलन फूफा हथिया के कान छुअते कहे लगलन सूपा बुआ निहर उनके अकिले हेरा गइल हाथी एगो अन्हरन के गांव में जब आ गइल ।। थाक गइलन गब्बर सिंह तब अइलन शांभा हथिया के गोर छुहलन कहे लगलन खांभा थाह गब्बर, शांभा के एहिजन बुझा गइल हाथी एगो अन्हरन के गांव में जब आ गइल ।। मुखिया जी देखे अइनी ई का चमत्कार बा लागल जेकरा पीछे सगरो…

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65 के बात बा

ताव बा मोछिया प छाती उतान बा, चले जब रहिया में भुईया हिलत सरकार बा, साचो के लागे इ उमिर काच बा ढेर नाही अभियो 65 के बात बा । नजर जब उठावे त रहिया होला खाली, रस भरल इनकर मीठ मीठ बोली, मनमोहक बाटे इनकर अंदाज हो ढेर नाही अभियो 65 के बात बा। दांते से छिले ले उखिया बरियार हो ठेहुन से तुरे ले उखिया दुटुक हो, रुनियो चबाले बरियार दांत से पट पट तुरेले अखरोठ दांत से, उमिर काच बा खाली 65 के बात बा । ऊपर…

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