अशोक प्रहरी संस्था के छठवां भव्य राष्ट्रीय भोजपुरी कवि सम्मेलन सम्पन्न भइल

गाजियाबाद।  रविवार दिनांक 16/09/2018  के लोहिया नगर के हिन्दी भवन में अशोक प्रहरी संस्था के छठा भव्य राष्ट्रीय भोजपुरी कवि सम्मेलन एह बाति का गवाह बा कि भोजपुरी कविता के उछाह हिन्दी कविता से तनिकों कम नइखे। एह कवि सम्मेलन में दिल्ली– एनसीआर, यूपी व बिहार भोजपुरी भाषा के जन- प्रिय कवि लोग हिस्सा लीहले आउर देर राति ले सभे आपन लोक भाषा के सुगंध आउर ओकरे कवितई के सुघरई से श्रोता लोग सराबोर होत रहलें। एह मोका पर कार्यक्रम के मुख्य संयोजक अशोक श्रीवास्तव जी कहलें कि भोजपुरी भाषा…

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कजरी

नीमिया गछिया प ढिलुहा लगाई द पिया सखियन के बोलाई द पिया ना।। ———————————————— पुरवा कइलस बेचैन देहिया बथे दिन रैन आव ढिलुहा लगा तु ढुलाई द पिया गरमी सुखाई द पिया ना।।१।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————– बड़ुए गोदिया में ललनावा गावसु सखी सभ गानावा तुहुं सखियन संग लईया मिलाई द पिया कजरी सुनाई द पिया ना।।२।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————– केशिया नागिन लेखा लहरे मुँह प आई आई के ठहरे केशिया बान्ह के तू जुड़ा बनाई द पिया सखियन के जराई द पिया ना।।३।। नीमिया गछिया प ढिलुहा——————— सईंया…

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सोहर

घर घर बाजेला बधइया, कि कृष्ण जी जनम लेले हो, अरे लाला मथुरा के दिनवा बहुरि गईले, नंद घरे सोहर हो।   धन्य धन्य बाबा बसुदेव, जे सब गुन आगर हो, अरे मईया धन-धन, देवकी दुलारी, जे जनली दामोदर हो।   पहिले पाहिल पांव परसेली, जमुना जुड़ा गईली हो, ललना मधुर मधुर, मुसुकईलन, मुरली मनोहर हो । संजय कुमार चतुर्वेदी

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बीरन अँगना (राखी क गीत)

पहिरब हरियर चुड़िया पीयर कँगना बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   ससुरा मे ननदो के करब दुलरवा भरब अकवारि करि उनके सिंगरवा भींग भींग जइहें उतरि नेह झरना ॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   लेइके असिसिया जइबे नइहरवा सुन लागि ससुरु के घरवा दुवरवा धरबs डहरिया लेई संग सजना॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   हाथ मे नेह माथे कुंकुम टिकवा आरती करब जइसे मोर सलिकवा जीयs मोर भइया सुख सपना॥ बान्हे जाइब रखिया बीरन अँगना॥   भउजी के सगवाँ मे करबि ठिठोली हँसि हँसि चहकब बोलि मीठी बोली…

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सगरों झोले झाल बा का जी?

                      का जमाना आ गयो भाया , जेने देखी ओने लाइने लाइन लउकत बा। सभे केहू लाइन मे ठाढ़ ह, चुप्पी सधले आ भीतरे भीतर अदहनियाइल। कतना बेबस लउकत बा मनई, तबों दम बन्हले, हुलास आउर जजबा से भरल-पूरल। आगु आवे वाला दिन नीमन दिन होखी एकर बाट जोह रहल बा। कथनी आउर करनी मे उपरियात थोर बहुत नीमन पल के हेरे के भागीरथ परयास करत आम आदमी, तभियो जय जय क रहल बा। वाह रे , जमाना  ! ई…

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‘भोजपुरी साहित्य सरिता’ के अगस्त अंक के लोकार्पण

दिनांक 5 अगस्त, माने अतवार के हर्फ़ मीडिया प्रा लिमिटेड के आयोजन ओपन माइक के कार्यक्रम में ‘भोजपुरी साहित्य सरिता‘ के अगस्त अंक के लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक लव के हाथे भइल। भोजपुरी साहित्य सरिता‘ के अगस्त अंक के लोकार्पण वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अशोक लव जी पत्रिका टीम के ओकरा निरंतरता, प्रस्तुति आ सामग्री खातिर बधाई देहवीं। ऊंहा के समय पर प्रकाशित रूप में सामने लावे ला हर्फ़ मीडिया के विशेष धन्यवाद देहवीं। लोकार्पण के विशेष अवसर के बेरा पत्रिका के भोजपुरी साहित्य सरिता‘ के अगस्त अंक के लोकार्पण…

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लाल बिहारी लाल के दू गो लोक गीत – सातों जनम तोहरा से, लड़ल नजर रिकार्ड्भइल

सोनूगुप्ता नई दिल्ली। कवि,लेखक,पत्रकार आ समाजसेवी लाल बिहारी लाल केदू गो लोक गीत सातों जनम आ तोहरा से लड़ल नजरिया प्रज्ञा म्यूजिक कंपनी प्रा. लि. से पंकज कुमार के निर्देशन में हेमा हैप्पी एवं राज किशोर के आवाज में रिकार्ड भइल ह।लाल के हाल ही में दू गो भोजपुरी लोक गीत आर.एन. फिल्मस् एंड मीडिया कंपनी से – पिया निरमोही, बलम निरमोही आ दूसरका अबत घरे आजा बालमा रिकार्ड भइल रहे..। जेकरा में स्वर देले बारी लोक गायिक कंचन प्रिया । एह गीतन में एक गीत यू ट्युब पर पिया…

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निर्गुन

नेहिया तोहार हउए सोनवा के गहना ललकी चदरिया उघार$ जन सजना सुखवा के निंदिया आइल बा पलकवा सुखवे के बोलिया में रूकता हलफवा सुखके मिलन बा चिक्कार$ जन सजना | सुसुकेला काहे केहू पिटेला हो छाती सेजिया प सुतल बानी बनी एहवाती मिले जालीं बाबा से बिचार$ जन सजना | जनम जे दिहल ओकर रिन रहल बाटे पानी में पियासल जीव मिन रहल बाटे हउए ना जुदाई हिया फार$ जन सजना | लोकवा के लाज रहे लजिया निभइलीं माया में भुलइलीं माया में लपटइलीं डोलिया हो चढ़ाई के उतार$ जन…

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कजरी

आरे रामा मगन बाड़े त्रिपुरारी, भोले भंडारी ए रामा … | गावे उमड़ी घुमड़ी के बदरिया खेले झिसी पच्चीसी फुहरिया रामा आरे रामा संगवा में गउरा मतारी, मगन…. | जल ढारे केहू बंम बोलेला केहू बेदना में कंठवा खोलेला रामा आरे रामा जिनगी के कहे लाचारी, मगन…. | टरे लागेला दुखवा पराला कवनो बांझिन के अँचरा भराला रामा आरे रामा अइला के देर बा दुआरी, मगन… | कवन कवन महातम गाईं जोगिया के आतम में बसाईं रामा आरे रामा भगति में टेरीं पुकारीं, मगन…. | विद्या शंकर विद्यार्थी

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मड़ई

उड़े जिन आन्ही में पकड़ले बानी मड़ई दइबो हँसत होई देख ई दबंगई। उड़े— मड़ई उड़त हम धइ के बचवलीं जिनगी धरब कइसे उड़े जइसे पतई। हवा पानी अगिया से केतना लड़ब हम मड़ई का संगही उड़त देखीं मनई। मड़ई जगत उपलब्धि हउए अपनी मुअतो का बेर न छोड़त बने मड़ई । आनन्द संधिदूत

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