23 अप्रैल के मनीषा आरा के आरा रमना मैदान मे आपन गीतन के खुसबु बिखेरे जा रहल बाड़ी

भोजपुरी गीतन के लेके जवन आज एगो धारणा समाज मे भइल बा , ओकरा के बदले मे ढेर लोग लागल बा । ओहमे एगो बरियार नाँव ह – मखमली सुरों वाली लोकगायिका मनीषा श्रीवास्तव के । अपने मजगूत इच्छा के संगे मनीषा एगो नया प्रतिमान गढ़ रहल बानी । भोजपुरी भाषा आ ओकरे लोकगीतन के समृद्ध परम्परा बा, जवन मनई आ समाज के दिशा देवे मे सक्षम बा । गीत गवनई के जरूरत के पूरा करे मे सक्षम बा ।

मनीषा अपने लइकई से भोजपुरी लोकगीतन के बुझे , समझे आ गावे लगलीं। उनके एह प्रतिभा के उनुका दादाजी के आशीष मिलल । आज उनका मेहनत आ लगन से सफलता उनका पाछे पाछे चल रहल बा , उनका सुर आ गायकी के सनमान दे रहल बा । ढेर सारा मान – सनमान से नवाजल मनीषा अपने भाषा आ अपने माटी के सोंधी सुगंध सगरों फ़इला रहल बाड़ी । आवे वाले 23 अप्रैल के मनीषा आरा के आरा रमना मैदान मे आपन गीतन के खुसबु बिखेरे जा रहल बाड़ी । भोजपुरी साहित्य सरिता परिवार के ओरी से बधाई आ शुभकामना बा ।

 

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