लोक गीत

न जा, न जा न जा न जा न विदेश हो सजन। अपने नदिया किनारे बाटै, खेत हो सजन।   तोहसे अलुवा बोवईबै- संघवा-संघवा निरईबै। तोहसे मर्चा बैठैईबै, संघवा-संघवा तोड़ैईबै। तोहै देबै हम खेतवा- खेमटाव हो सजन।   न जा,न जा न जा न जा न विदेश हो सजन।   न जा,न जा न जा- दिल्ली बम्बई, न जा रेनूकोट हो। खेतिया जो करबा रजऊ, होई लहालोट हो। मिली जाई गांधी छपवा कै, नोट हो सजन।   न जा,न जा न जा न जा न, विदेश हो सजन।   जब…

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