देखत होई लो राँह

केतना खुशी भइल होई मन में जवना के नइखे थाँह। हमनिन   के   तारे  आवतारे   देखत  होई   लो   राँह।। केहू  के नाती केहू के लइका केहु के  ससुर केहू  के  बाप। मुक्ति दिलावे चलल बाड़े ओ लो का नाँव के करत जाप।। देखत होई लो उपर से कहत होई लो वाह………. व्याकुलता के सीमा ना होई होई लो बेचैन। जले जल दिहल ना जाई ली  लो नाही चैन।। जल मिलते आत्मा तृप्त हो जाई  पितरन के पूरा होईचाँह……… एक जगही पs होई लो नाही  घुमत होई…

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