इयाद रहबू – तीस्ता

जर से दूर होखल त हर बेटी के नियति होला हमनीके समाजिक ताना बाना के अनुसार । बेटी के जनमला के साथे साथ माई बाबू परिजन लाग जालन बेटी के बिदाई कइसे नीमन से होखी येह फिकिर में । एकर तैयारी त बेटी के जनमते शुरू हो जाला हमनीके समाज में ओइसने कवनो बाप के बेटी के डोली में बिदा कइला के जगहा आपन करेजा के टुकड़ा के अर्थी के कान्हा देवे के पर जाव त ओह बाप के पहाड़ जइसन दुःख क कल्पना भी आँखियन से लोर ढरकावे खातिर…

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कुछु पुछीं मत ए सर जी

हमरा पढ़े लिखे ना आवे ना आवेला गावे बजावे। रोजे इसकूल प आईना हम आपन भूख मिटावे। देखि रावा के जानीं हम डर जी कुछु पुछीं मत ए सर जी हम बानीं काँच उमर जी। भईंस धोइना घरवा बकरी हम चराईंना। सानी पानी करीं हमीं गोबरो मुत उठाईना। माईये बाबुये घोरेले जहर जी कुछु पुछीं मत ए सर जी हम बानीं काँच उमर जी। कहे ले लो क़िताब भोजन छात्रवृत्ति ड्रेस भेटाई। पढ़बे भा ना पढ़बे बाकी होई कुछ कमाई। माई बाबु के अतने फिकर जी कुछु पुछीं मत ए…

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आइल चुनाव

जंगल मे हड़कम मच गइल सबही अचानक साधू भइल दुआ बंदगी हाथ जोड़ी के सब लोगन के शीश झुकउल घूम घूम के सब जंगल मे लागल करय जुड़ाव……. ऐ बबुआ लागता कि आइल चुनाव शेर करय खरगोश से यारी बिल्ली चुहन के महतारी साँप नेवला गठबंधन कय पड़ल हर जुगाड़ पे भारी के, केकरा के देई पटकनी सोचत बा ऊदबिलाव….. ऐ बबुआ लागत कि आइल चुनाव मोर के सँग सियार है नाचत तेंदुआ बकरी के फुसिलावत मगरमच्छ बानर मिलकर के थल, जलचर में सेंध लगावत मछली कछुआ बन्द अब करिह…

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जिउतिया

जिउतिया    से     बड   कवनो,   माई   व्रत     ना    जानेली। लमहर उमरिया खातिर करsस, एतना लइकन के  मानेली।। बिना   खईले   पियले ,  रहेली   उपवास। ओह माई के कबहू, ना टूटे के चाही आश।। सतपुतिया के सब्जी खाली,मडुवा के  उ रोटी। नोनी के उ साग बनावस, कईसहु जाली घोटी।। सतपुतिया के पतई पs, खाना देली चिल्हो सियारो के । फेड पs राखस भा छत के ऊपर,ई करत रहेली कारो के ।। जिउतिया के  जीवित्पुत्रिका के, नॉव से भी जानल जाला हो।…

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