कजरी

आरे रामा मगन बाड़े त्रिपुरारी, भोले भंडारी ए रामा … | गावे उमड़ी घुमड़ी के बदरिया खेले झिसी पच्चीसी फुहरिया रामा आरे रामा संगवा में गउरा मतारी, मगन…. | जल ढारे केहू बंम बोलेला केहू बेदना में कंठवा खोलेला रामा आरे रामा जिनगी के कहे लाचारी, मगन…. | टरे लागेला दुखवा पराला कवनो बांझिन के अँचरा भराला रामा आरे रामा अइला के देर बा दुआरी, मगन… | कवन कवन महातम गाईं जोगिया के आतम में बसाईं रामा आरे रामा भगति में टेरीं पुकारीं, मगन…. | विद्या शंकर विद्यार्थी

Read More

मड़ई

उड़े जिन आन्ही में पकड़ले बानी मड़ई दइबो हँसत होई देख ई दबंगई। उड़े— मड़ई उड़त हम धइ के बचवलीं जिनगी धरब कइसे उड़े जइसे पतई। हवा पानी अगिया से केतना लड़ब हम मड़ई का संगही उड़त देखीं मनई। मड़ई जगत उपलब्धि हउए अपनी मुअतो का बेर न छोड़त बने मड़ई । आनन्द संधिदूत

Read More