इंद्रदेव ना पारस झांकी

ना कतहुँ बा,बरसत पानी बूँद बूँद के तरसे प्राणी। ताल तलईया पोखर सूखल बा अकाल सब रहींहें भुखल। चंवरा में बा परल दरार धनक गईल सब खर्ह पतवार। तेज घाम से मन मछिआला छेंहर खातिर सब छिछिआला। कौआ मैनी मोर तरासल गौरइयन के झुण्ड पियासल। चातक के बा अकिल हेराईल झींगुर दादुर बा भकुआईल। करिया घटा मचावे शोर बदरी देख,ना नाचे मोर। गईल आषाढ़,पांच दिन बाकी इंद्रदेव ना पारस झांकी। डा.सुनील कुमार उपाध्याय प्रोफ.कॉलोनी,मनोहरपुर कछुआरा पटना-800016@****

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