ओसहीं बा

बड़का बड़का राज बिलाइल राम के कुटिया ओसहीं बा मशीन के मुँह में बरध समाइल  घुघुर घँटिया ओसहीं बा सुगना रहस अलोता सबसे बनल रहे चउपहल घाट घाट क पानी पढ़ के रहे छिंटाइल महल तबहू उडल आकाश भवन से थरिया लुटिया ओसहीं बा बड़का बड़का राज बिलाइल राम के कुटिया ओसहीं बा।। बद बोली से जिनिगी में ना बरकत होई अहं बढ़ी तऽ आपन आपा अपने खोई धधकत ज्वाला जुगुनू बनल नाम नरेटिया ओसहीं बा बड़का बड़का राज बिलाइल राम के कुटिया ओसहीं बा।। चंदन लकड़ी चिता बोझाइल का…

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सुन्दर भोर

अम्बर के कोरा कागज़ प ललका रंग छिंटाइल बा, सोना रंग सियाही से  सुन्दर भोर लिखाइल बा I नीड़ बसेरन के कलरव के सगरो तान छेड़ाइल बा, अन्धकार के कबर के ऊपर आस उजास रेंड़ाइल बा I मंद पवन मकरंद बनल बा नीलकमल मुसुकाइल बा, मोती रूप ओस धइले बा गुलमोहर सरमाइल बा I भानु बाल पतंग बनल बा तितली दल इतराइल बा, कोयल, संत, सरोज, बटोही सबके मन अगराइल बा I — डॉ. हरेश्वर राय, सतना, मध्य प्रदेश

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हाइकू

थिर बयारि रसबूनीं बरिसऽ आतुर मेघा खखन पौध घन मानर बाजे आवऽ अब त साँवर मेहा आँख चोरावे चान नींदरि माते देख तनी-सा बेदरदी ह नेह भरल बावड़ी उमड़ल हा सुबहिते निकसी हूक कि प्राण दिनेश पांडेय

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बारिश के दिन

बारिश के दिन आइल बा। सूखल पात हेराइल बा। गौना बरात के दिन बीतल बैंड आ बाजा चुपाइल बा। नाव चलवले मे कागज के लरीका सब मनुआइल बा। छत पर अब ऊ ना आवेली छतरी के दिन आइल बा। बदरे करेलं आंख मिचौनी इयाद केहू के आइल बा। रहल किसान सूखा से चिंतित बाढ से अब अफनाइल बा। नाचे लगलं मोर मोरनी जब से बरखा आइल बा। धान के रोपनी होखे लागल खेत मे गीत सुनाइल बा। बीछला के गिर गइलं मंगरु पूरा बदन चोटाइल बा। ये ही मे दारु…

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