परिभाषा माने जवन हम गढ़ी………!

का जमाना आ गयो भाया, अब मनई लोग के बजार लाग रहल बा। दोकान सजा – सजा के लोग बइठल बा, खरीदे वालन के इंतजार हो रहल बा। जेकरा नइखे बेचे के, ओकर मालिक लोग पहाड़े हाँक देले बा अपने मवेसियन के। राशि एकही बा मवेसी आ मनई के। अपने हिसाब से बूझ लीहल जाव। हम बड़का, हम बड़का के हो – हल्ला चारु ओरी मचल बा। केकरो चैन नइखे, जे चैन मे बा, ओकरो चैन मलिकार लो छीने मे लाग गइल बा। कुछ के त छीनियो लेले बा। जेकरा…

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