विरह गीत

आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले पिया अचके समुंदर के झाग भइले का बताईं कि केतना दरद बाटे दिल लागे सूना सजनवा के बिना महफ़िल कब उचरिहें बँडेरी के काग भइले आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले पिया अचके समुंदर के झाग भइले ।। काहें कइलऽ कपट तू कन्हैया कहऽ काहें मनवा चोराके भोरवले रहऽ राग मधुबन के काहें विराग भइले आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले पिया अचके समुंदर के झाग भइले ।। कहिया अइब बता दऽ तिथि वार दिन लेके आइब सुगंधित सुमन बिन-बिन हिया आवन के असरे…

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जय भोजपुरी जय भोजपुरिया के संगीत संध्या सम्पन्न भइल

– लाल बिहारी लाल नई दिल्ली “हँसी, ठिठोली, बोली आ ब्यवहार गजब बा, भोली सूरत, रहन-सहन, तेव्हार गजब बा” भोजपुरी के मूर्धन्य कवि एवं गायक श्री संगीत सुभाष जी की इन पंक्तियों के साथ कार्यक्रम का आगाज हुआ साथ ही साथ श्री शशि अनाड़ी, श्री अजय प्रकाश तिवारी, श्री विनोद गिरी के गाने को भी श्रोताओं की भरपूर सराहना मिली । मौका था रविवार 27-5-2018 को “जय भोजपुरी-जय भोजपुरीया” भोजपुरी बोली एवं सँस्कार के क्षरण को रोकने में लगी सन्स्था के तत्वावधान में दिल्ली के बदरपुर के नजदीक मीठापुर में…

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उत्त-र प्रदेश में उठल भोजपुरी के द्वितीय भाषा के दर्जा के माँग

विशेष सूत्र संगमनगरी इलाहाबाद में शनिवार, 26 मई, 2018 के दिन देश-विदेश के भोजपुरिया बुद्धिजीवी लोग के जुटान भइल आ भोजपुरी के संविधान के आठवीं अनुसूची मे शामिल कइला से लेके भोजपुरी के अश्लीलता मुक्त बनवले तक क बात उठल । मौका रहे राष्ट्रीय मासिक पत्रिका “भोजपुरी संगम” आ संस्था “भोजपुरी विकास एवं शोध संस्थान” के ओर से आयोजित भोजपुरी उत्सव “मांई” के । कार्यक्रम के उदघाटन उत्तर प्रदेश के महिला आ परिवार कल्याण मंत्री श्रीमती स्वाती सिंह कइलिन । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत में माॅरीशस के राजदूत श्री…

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मौसम आ चमगादड़

टेसू फुलवा का खिलल, लागल बन में आग। तितिकी ना धूआँ उठल, जरल जीव हतभाग। मौसम अस गरुआह बा, उजरल टाटी बाड़। पछिया हवा ओसार में, उलिछे धूर कबाड़। बनखंडी निर्जन भयद, सूखल तरुवर डार। बादुरकुल उलुटे लटक, साधत बामाचार। दिन में लागस जोगिया, अति अबोध अबिकार। होते रात अन्हार में, बधिकन के सरदार। धुआ सरिस लवले रहस, घोंचू भद बदनाम। जसहीं धरस चपेट में, चिमट चबावस चाम। दिनेश पाण्डेय

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गरमी रे गरमी!

गरमी रे गरमी! कतिना बेसरमी? पानी बिन परती, फाटि गइली धरती, कुकुर गइले पोखरी रे,  धइले बा बएखरी रे! गिरगिट के पियरी, गरई के बियरी, पोठिया नसइली, मरि के बसइली, सूना बा रहतिया रे, ठावें-ठावें घतिया रे! दिनों भरी पछिया, मुरुझेली गछिया, पानी क निसानी, भूतही कहानी, बावरी हिरनियाँ रे, कहेली भीलनियाँ रे! झरल झुरल पतई, सूख रहल लतई, दढ़ीजर खिलंदड़, उठेला बवंडर, डोले बँसवरिया रे, बजेला बँसुरिया रे! भइँ पीछू मैनी, काग क बेचैनी, धाव- धूप- धूरी, मुँह प बेनूरी, निरलज कोइलिया रे, बोलेली कुबोलिया रे! दिनेश पाण्डेय

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