लोकतन्त्र पर खतरा बाटे

रोज पतन के जतरा बाटे लोकतन्त्र पर खतरा बाटे ॥   अइसन लोग कहल, हम सुनली बइठी उहाँ मन ही मन गुनली अललै पीये गंगा तभियो नीमन बूझ उनही के चुनली ।   जीत भइल सतभतरा बाटे लोकतन्त्र पर खतरा बाटे ॥   कब का सही, गलत कब उहे भेंटला पर भर नीमन कहे परी जरूरत सब कुछ चिक्कन पहिले त सब बाउर रहे ।   साँचो! ससुर छनमतरा बाटे लोकतन्त्र पर खतरा बाटे ॥   कीनी खरीदी चोर उचक्का चमक धमक मे बा जे पक्का करिया करिया सुटकेसन से…

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