गीत

डार बिछुरल पतई कहली हमहुं त डार के लगहीं रहली। झोंका हवा के भुइयां पटकलस फेर जहवाँ ले गइलस गईली।। ना हमरो आपन केहु बा ना हम बानी कुछहु अपने संउसे डार गिरत बेरिया फूल-पतई देखत रही गईली।। एहन ओहन खूब घुमवलस तोड़ मचोड़ के टुकड़ा कइलस। फेर उड़ा के छितर-बितर करी लेई जा के गंगा में धइली।। गंगा हमके बहा ले गईली जा सागर से भेंट करइली सागर माथा लगहीं देखली देखी निहोरा उनका कइली।। एगो ढेला कतहीं से अइलस हमरा के उ गले लगइलस। टान-टून के पार उतरलस…

Read More

घर के मजदूर

शहर मे हम मशहूर हईं। पर घर मे मजदूर हईं। भोरे पांच बजे उठ जाईं। गैस जलाईं चाय बनाईं। मेहरारु लगे ले जाईं। ओके जगाईं और पिआईं। जी हजूरी करत रहीलां हम येतना मजबूर हईं। हम घर मे मजदूर हईं। ओके शहरीयो मे ले जाईं। लुग्गा आ बिख्खो कीनवाईं। बाल्कनी मे फीलिम देखा के चाट मिठाई ओके खिआईं। खुश होके कहेली तब ऊ चमन के हम अंगूर हई। हम घर मे मजदूर हईं। रही-रही देली गीदड़भभकी। नइहर गईले के नित धमकी। जौन कहेली तौन करीलां तब्बो कहेली हमके सनकी। जौने…

Read More

मजदूर दिवस के कइसे देहिं बधाई

निक मजूरी के चलते छूठ गईल गउवाँ । हित नात कुल छूटल भूलाइल पुरखन के नऊवां ।। गावँ के बनिहार के, शहर मजूर बनवलस । निक मजूरी भेटाई इहे हँस के बतवलस ।। काम क घंटा यहां तय बा ये भाई । चाहे तपे सुरुज चाहे चले हवा हरजाई ।। होते सबेर लोगवा कारखाना और धऊरता । सपना होइ पूरा सोच आस के फुलवा मऊरता ।। बचवन के निक शिक्षा भेटाई । गरीबी के नाँव ई शिक्षा ही मिटाई ।। दवाई किनाई जवन माई के जिनगी बढ़ाई । बाबू के…

Read More

मजदूर दिवस

बनी गईलन मजदूर हो जब भइलन सनेहिया से दूर हो। चिरई बोले से पहीले काम निपटा के चली भइले खेतवा के ओर हो।।जब……….।। चार रोटी संगे बाटे मिरिचा पियाज हो, कालह तरकारी बनीं लागल मन में आस हो, खेतवा के देखी-देखी चमकेला अँखिया के लोर हो।।जब……………।। लइकन के चहक से मनवा बिहसेला सगरी थकान तनिके में भाग जायेला इनके से बाटे सारा जिनगी अंजोर हो।। जब…………।। छोटकी मड़ईया महल अस लागे मेहरी के बतिया कोयल जस लागे बंधल बा पीरितिया के डोर हो ।।जब…………।। खुरपी-कुदाल हऊवे इनकर संगतिया रतिया ना…

Read More