पड़लन राम कुकुर के पाले

“ए साह जी हो, तनी एगो कड़क चाय पियवता भाय।आज दिमाग बड़ा गरम ह।”हाँफत-हुँफत हलकान हाल नन्हकू अड़ी पर अवते साह जी से फरमाइस कइलन। ” काहें मूड ख़राब ह नन्हकू भइया।बतावा भला साह जी! जे काम के न काज के,दिन भर लखेरा नियन घुम्मत रहेला ओहू क मूड कब्बो खराब हो सकेला ?।” एक जाना नन्हकू के दिमाग क  तापमान बढ़ावत हंसी कइलन। ” ए साह जी!कह देत हईं कवनो दिने तोहरे दोकान पर खून-खराबा हो जायी त हमके दोस मत दीहा।ई ससुर जवने के सोझ डहरी ना चले…

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बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना

का जमाना आ गयो भाया , “बेगानी शादी मे अब्दुल्ला दीवाना” कूल्ही ओर फफाये लागल बाड़न सs। पतरी पर छोड़ल खइका खइला के बाद जइसे कुकुर अइठत चलेलन सs, ओइसही इहवों ढेर लोग चल रहल बाड़ें । का कहीं महाराज , दोकान – दउरी बन्न होए के अपसगुन देखाए लागल बा । फेर त “उपास भला कि पतोहू के जूठ” , जियल जरूरी बा त पतोहिया क जूठवों के साफ आ मीठ बुझही के परी नु । खइला के बाद पतोहिया के गोड़वों पुजही के परी नु । पुजाइयो रहल…

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“चिठ्ठी”

“Ravi sir, there is a letter for you” “रवि सर, तहरा खातिर चिठ्ठी बा” कहत चपरासी रवि के सेक्शन में दाखिल भईल। चिठ्ठी के नाम सुन जेतना अचरज रवि के भईल ओतने उनके सहकर्मी कुल के। आजु के जमाना में भी चिठ्ठी भेजे ला केहू। रवि के भी निमन से याद रहे कि बरसो से उनका के केहू चिठ्ठी नईखे भेजले। चपरासी के हाथ में चिठ्ठी के लम्बाई से देख के ही उ समझ गईले कि इ विदेशी चिठ्ठी ह अउरी हाथ में लेते ही ओयिपर मोट लिखावट से उनका…

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कुशिआरी

बिआह-समंध बड़ी टुनकाह चीझ ह जी! सुरुए से सइ-सइ बीपत। कबो नाइ मँझधार में नापता हो जाला त कबो कचारे में मरा जाला। ते प कुश काका जइसन करजिब्हा अदिमी गाँव में रहस त सरबनासे बूझीं। असहूँ कहल जाला कि जेकर खेत में कुशिआरी निपज जाय ओहि गिरहस्त के सात पुहुत तक अन्न के दरसन ना करि पइहें। नीसन शहतीर अस गाँव में लागल घुन रहे ककवा, जवन तरे-तरे पूरे गाँव के रेसा-रेसा भुरकुस क दिहले रहे। बतकटी, पिनुकाही, गरपराही, कुभाखन, चुगलर्इ, र्इ सभ अइसन ऐगुन-गिरोह रहीसँ जवन उनुका में…

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बेमारी

बलमा बढ़ जाए आगा, मोहे  टारी  ए  सखी, जब से धइले बा फेसबुक के बेमारी ए सखी ।   आधी-आधी   रतिया  ले   नेटवा  चलावेला, अपने   ना   सुते  संगवे   सभे-के  जगावेला। टीना जस  गरम होखे  बिपती भारी ए सखी, जब से धइले बा फेसबुक के बेमारी ए सखी ।   बेरि-बेरि बाजे  टुन-टुन  कबहीं  थरधराला, बड़का भिनुसहरा  ले जानू काथी  जोहाला । नित भहरत  बा  नाता  के  दोचारी  ए सखी जब से धइले बा फेसबुक के बेमारी ए सखी ।   आँख धंसि जोत घटी  दरद…

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जीवन पानी पानी

भीतर तक जाके घुसल बा राजनीति के तीर टुअर बनके घुमत बाड़े साधू सन्त फकीर I   उज्जर उज्जर कुरतावाला भेड़िया उत्पात मचवले बा थूक रहल बा सबके ऊपर सबके नाच नचवले बा I   पसर रहल बा चारु देने बारूदी बिषबेल पर्दा के पीछे से केहू खेल रहल बा खेल I   गुलमोहर के जंगल में लाग गइल बा आग मड़ई के ऊपर बैठल बा आके करिया नाग I   कंठ नदी के सूख रहल बा पोखर मांगे पानी निकल गइल बा हवा हवा के जीवन पानी पानी I…

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हे शहरी बाबू

हे शहरी बाबू न अइह$ हमरे गांव हो। फेर-फेर आवे के लेब$ नाही नाव हो।   आम और इमली के पेड़ बा कटाईल। अर्जुन यूकिलिप्टस के पौधा रोपाईल। पीपर के पेड़ सुखल मिली कहां छांव हो। हे शहरी बाबू न अईह$ हमरे गाँव हो।   राम अऊर रहीम घरे, भईल बंटवारा। बंटा गईल सगरो, दलान आ ओसारा। आपस मे बढल बाटे केतना दुराव हो। हे शहरी बाबू न अईह$ हमरे गाँव हो।   दूर-दूर ले चील गिद्ध ना देखाता। नीलकंठ देखे के सब अफनाता। अब बस कउवन के बा कांव-कांव…

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तू कब आबेला…

तोहार याद बहुत आबेला | तू दिल से कबहूं दूर न जाबेला || कईसन रोग लगाबल जो तू छोड़ के चली गइल तोहरी कसम संगे जीने-मरने की हमके याद बा इ तेरी बेबफाई हमके जीना करी दुस्सबार || तोहार याद बहुत आबेला | तू दिल से कबहूं दूर न जाबेला || पतझड़ भइल जिंदगिया हमार तुहसे कतनों करीं प्यार केकरा को बताब जमाना बहुत खराब तनिक आबा, तोहार याद बहुत आबेला | तू दिल से कबहूं दूर न जाबेला || रोई-रोई अंखियां सूखीं बिगडल हमरा हाल बीच भँवर में फस…

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देखा बसंत फिर आइल बा

सरसो के फूल फुलाय गयल अमवों देखा बउराय गयल पर झूरी-लोचन कै मुंहवां हर साल जइसे पियराइल बा देखा बसंत फिर आइल बा । जब-जब बसंत रितु आवैले बन – बाग बहार लिआवैले पर चम्पा चाची के घर में दुख के चादर फइलाइल बा देखा बसंत फिर आइल बा । पतई पूरान सब झरि जाले नई फुनुगी पेड़ पे उगि जाले पर जोखना करजा के लुह में टिकोरा जइसे चिचुकाइल बा देखा बसंत फिर आइल बा । जब हवा चलै त उठै महक कोयलिया गावै चहक-चहक पर कुहुकि रोवैं मीना…

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नन्हकी के माई

आज भोरही से मड़इया में  खुबे आवाजाही  लागल बा। नन्हकी के माई आज अकवार से बाहर निकल जात बिया। बड़की चाची  जब खिसियास त उ घरी तनी घुघटा के  सरका के कहस- ए अम्मा!  बहरिया कोई ना रहल ह। आ नन्हकी के कबे से कहतानी सुनते नईखे।त हाली हाली निपटारा करे खातिर …………. एतने में – ‘अच्छा ठीक बा। जा घरे ‘बड़की चाची के  ऐलान सुनते भीतर चल गईली। ए नन्हकी ! सुन ! साबुन से  बढिया से मुँह धोके पउडरवा तनी लगा लीहे। अबकी तोर मुँहवा साफा लागता ।…

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