सजन धीरे- धीरे……..

कुम्हलाइल बा देहिया सजन पोरे-पोर आके मरहम लगा जा सजन थोरे-थोर देखले बानी हम जब से हेराइल बा होश हीया चिहुंकेला जब हम उठी ले भोरे-भोर हो गइल बा तब से ई लब मोर खामोश लाल से दूध अइसन भइल ठोर-ठोर मानवा नाचेला सोंची कब लेत आगोश देख बदरी के वनवा मे नाचे मोरे-मोर लालसा लाल के लागल बा द तू पूरा नेहिया अइसे तू जोड़ दिखे डोरे-डोर लाल बिहारी मनाई कतनों माने ना दिल झुलसे विरहा में हमरो बदन पोरे-पोर आके मरहम लगा जा……….   लाल बिहारी लाल

Read More

एथी उखरबा………?

केकर केकर का बिगरबा एथी उखरबा ॥   के देहलस तहरा जिनगी जिये क सउर फेरु होते सउर सूंघत बाटा घूर एकरो का फुनगी पकरबा एथी उखरबा ॥   ठप्पा लगते लूट खसोट आ गारी अरे ई काहो कवन बाटे बेमारी दुधवो के माछी नकरबा एथी उखरबा ॥   फेर लगल चाटे कबों मुँह कबों तरवा एकरा मुँह से निकरत डेंगू  के लरवा का मरदे ! ओकरS सकरबा एथी उखरबा ॥   डारत रहे मंठा आज हिलावत पोंछ का बखानी चरित उघारीं ओकर सोच हजमोला संगे डकरबा एथी उखरबा ॥…

Read More