हेरत रहीं कविता के

ढेर लोग कहल ह आजु कविता दिवस ह मन के गउंखा से एगो आवाज आइल केकरे खाति लिखाई चोरन खाति बकचोन्हरन खाति थपरी के भिखमंगन खाति भा चुटकुलाबाजन खाति ।   फेर कविता नाही लिखाई काहें नाही लिखाई ? नेतवन खाति लुटेरवन खाति कामचोरन खाति सुखत इनरा के बेंग खाति ऊपरी चापरी बटोरे वालन खाति भा कवनों विशेष खाति ।   लिखीं कुछो कि न लिखीं एही मे अझुराइल भोरे से साँझ हो गइल जोजना लेखा जवन भूइयाँ नाही उतरे धूर माटी के डरे ।   बुझाता कविता के वाइरस…

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भोजपुरी फिल्म “मन के कचोट” के भव्य मुहुर्त भइल

भोजपुरी सिनेमा अबही अपना स्वर्णिम दौर से गुजर रहल बा। एही क्रम में भोजपुरी सिनेमा के माध्यम से भोजपुरी भाषा विश्व में आउर प्रभावशाली बनल बिया। जेतना सिनेमा सशक्त भइल बा ओतने साहित्य भी सशक्त भइल बा। एही क्रम में एम भी ए फिल्मस के बैनर तले बने जा रहल भोजपुरी फिचर फिल्म “मन के कचोट” के दिल्ली के विजय एन्क्लेव, पालम में भव्य मुहुर्त सम्पन्न भइल। एह फिल्म के कहानी भोजपुरी आ हिन्दी के साहित्यकार वैद्यनाथ विभाकर जी के लिखल ह , पटकथा आ संवाद अभिषेक भोजपुरिया के लिखल…

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