उघार होत बेरा चिल्ल पों काहें —?

का जमाना आ गयो भाया ,सगरो उंगरी उठे लागल बा । जे लमहर फरीछ बनके डोलत रहल ह ,ओकरे उजरकी धोतिया पर छिटकी पड़ल देखात बा । कतनों टह टह बरत होखे धोतिया ,छिंटकिया त चमकिए जाले , छिपे ना । अचके ई छिंटकिया आइल कहाँ से , ई अभियो एगो रहस्य बा । का अबले तोपल ढांकल रहल हे भा ई टटका पड़ल हे  , एकरो खोजबीन होखही के चाही । बाकि खोजबीन करी के , जे जे करे वाला बा , उ सभे कनई मे सउनाइल बा ।…

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