रंग फागुन के

रंग फागुन के जीवन में घोलीं सभे, प्रेम के पर्व ह, खेली होली सभे ।   एह, में नइखे उमिर के बंधन कहीं, जात-धरम के ना कवनो बाधा कहीं । तन-बदन एकरा में डुबोलीं सभे, प्रेम के पर्व ह, खेली होली सभे ।   एह में घोरल, पुरूखन के आशीष बा, संग में जोरल, परिजन के संदेश बा । लेके आशीष शुभ -शुभ बोली सभे, प्रेम के पर्व ह, खेली होली सभे ।   देवता -देवी के एकरा में वरदान बा, मेल-जोल-एकता के अभयदान बा । एक हो जायीं फिर,…

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