मैना

सँझिए त हँसत चैन नींनि सुतलू, रोवत भइल काहें भोर हो? के तोर खोंतवा उजारल ए मैना, कइके करेजवा कठोर हो? फुदुकत रहलू तू बाबा अंगनइया, भइया से करत टिसाही। माई की अँखिया की पुतरी के जोती, अर्हवल के कइलू ना, नाहीं। लीपि- पोती अंगना, बिहान- साँझि चिक्कन, कइलू तू घरवा अँजोर हो। छनहीं में दउरि दुअरवा की गइया के, अवरू बछरूआ के सानी। छनहीं भतीजवा के दूध- भात खोरवा, छनहीं में बाबा के पानी। रात- दिन टहल बजवलू, ना थकलू, कइलू ना मन कबो थोर हो। घोड़वा चढ़ल अइलें…

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