मखमली सुरों की मल्लिका मनीषा श्रीवास्तव के होली एल्बम कल आ रहल बा –

आज जब श्लील गीतन के बात होता , त एगो भोजपुरी के पारंपरिक गीतन के अपने मखमली आवाज से सजावे आ सँवारे वाली गायिका मनीषा के इयाद करल जरूरी हो जाला । आज ले हम उनुका जेतनी गीत सुनले बानी, सब गीतन मे अपने माटी के सुगंध पवले बानी । कबो “मिथिला नगरिया मे शोर भइलें” , त कबों “अँगना मे रोवेली दुलारी धिया”  त कबों कवनों आउर , उनुकर गावल कूल्हे गीत मन के झकझोर जाले । हमरे खाति त उ हमार छोट बहिन बानी । उनके प्रगति ला…

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फागुआ

पुरनकी पतईया, फेड़वा गिरावे | जइसे गिरहथ, कवनो खेतवा निरावे || नईकी पतइया बदे, जगहा बनावे | जायेके बा एक दिन, इहे समझावे ||   चईती फसलिया बा, गदराइल | लागत फगुनवां बा ,नियराइल || सरसो पियरकी से, खेतवा रंगाइल | अमवाँ मउराईल, महुवा मोजराईल ||   चारु और सुनाता, कोइलिया के बोली | भइया त खुश बान, देख भौजी के डोली || ढोल मृदंग के, धमाल खोरी खोरी | उड़ता रंग, अबीर, चारु ओरी ||   फगुवा में भंगिया के, कदर बढ़ जाला | भख के बुढ़वो, जवान होइ…

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