जाड़ा अउर खेती

छोड़ीं अब जाड़ा के डर, धरी रजाई अउर छोड़ीं घर । खेतवा में पटवनी कराईं, हत्था- ढ़ेंकी प हाथ गरमाईं । पानी पड़ी त$ पाला भागी, सब किसान के भाग जागी । देखीं हरियर सरसों आ गहूँ, अईसन खुशी ना मिली कहूँ । कटी फसल, आनाज बेंचाई, धन – वैभव – लक्ष्मी घरे आई । नाया नाया सापना बिनाई, बाल बचन के खुशी किनाई । नया साल के बा ईहे अरमान, खेती बाड़ी के जन हो नोकसान । अईसन कुछ करो सरकार, सभे रहे खुश अपना घर दुआर । संजय…

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गणेश वंदना

आवऽ आवऽ हों गणेश। माँई संग गऊरा, पिताजी उमेश उमेश ।। मानुष के तन बाँटे, हथिया के मुँहवा… बाबाजी गणेश के, सवारी सुचि चुहवा …. बिघ्न हरेले बाबा, सगरो कलेश। आवऽ आवऽ ………………….उमेश।। गणपति बाबा हई ,सुमंगलकारी… एकबेर सुनली बाबा अरज हमारी… दरशन देदीना, धरी कवनो भेष। आवऽ आवऽ………………उमेश।। एकदंत मुख, गजलम्बोदर… सुन्दर तिलक ललाट पर शोभत… लड्डूआ त चढ़े, बाबाजी के भेंट। आवऽ आवऽ……………..उमेश।। सुर नर मुनि गाँवे, राऊर गुणगनवा…. सब देवतन से पहिले, होखेला पूजनवा… धरती गगन पूजें, पूजेंले सुरेश। आवऽ आवऽ.. ………….उमेश।।   सुनील कुमार दुबे डेमुसा…

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