चम्पारण के जन कवि स्व.बृज बिहारी प्रसाद ‘चूर’ 

चंपारण के सुप्रसिद्ध कवि बृजबिहारी प्रसाद चूर(23 जनवरी 1914-) के भोजपुरी कविता- “चंपारण के लोग हँसेला” (1954 ई में प्रकाशित)चंपारण के महिमा के बखूबी बखान करत बा, रउरा सभे आनंद लिहिन- चंपारण के लोग हँसेला. हम बता दिही कि बृजबिहारी प्रसाद ‘चूर’ वइसे त ‘चूर कवि’ से प्रसिद्ध रहीं . चंपारण में  जनकवि के रूप में ‘चूर जी ‘ के प्रसिद्धी रहे, रहे  काहे  ना जे  आपन साहित्य साधना आम जन, आम  मनई, आपन  माई  भाषा भोजपुरी आ आपन जनम  भुई ‘चंपारण’ के खातिर कइले  होक, जेकर कविता अबाल वृद्ध…

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हम भोजपुरिया साहित्यकार बानी आ तू ……?

का जमाना आ गयो भाया , जेहर देखा ओहरे मचमच हो रहल बा । सभके त भोजपुरिया साहित्यकार कहाये के निसा कपारे चढ़ के तांडव क रहल बा । 56 इंची वाला एह लोगन देखते डेरा गइल बा , एही से दिल्ली छोड़ के गुजरात भागल बा । मने हेतना बड़का , जे केकरो सुनबे न करे । दुवरे बइठल भगेलुवा के बड़बड़ाइल सुनके सोझवे से गुजरत सोमारू के ना रह गइल , त उहो हाँ मे हाँ मिलावे ला उहवें ठाढ़ हो के बतकुचन मे अझुरा गइने । का…

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