सब बदल गईल बा

हर लोग बदल गईल बा व्यवहार बदल गईल बा, नईखे बांचल मेलमिलाप हर राज बदल गईल बा।। धोखा से भरल हर रास्ता छल से भरल हर रात, अन्हार लउके दिन में अंजोर भईल हर रात।। हर शब्द बिखर गईल बा हर छन्द बिखर गईल बा, कतहीं मेल ना लउके यार हर गीत बदल गईल बा।। खान बदलल पान बदलल रहे के दलान बदल गईल बा, मान बदलल जहान बदलल सब अरमान बदल गईल बा।। नीति बदल गईल बा राजनीति बदल गईल बा, आंगन के स्वरुप बदलल बाबू के जोड़ल भीत…

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नन्हका के संगे

अगिली में पछिली में बरखा में बिछिली में बनल जाव बचना , नन्हका के संगे ।।   बबुआ दुलारे में कजरा लिलारे में खनक गइल कंगना , नन्हका के संगे ।।   कबों जाला मुसकाय फेर धूरि सउनाय सजल मोर अंगना, नन्हका के संगे ।।   बेर बेर दुलराय आइ गरे लिपटाय सफल ईस रचना , नन्हका के संगे ।। झूमल मोर सजना , नन्हका के संगे ।।   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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