शुक्रवार के उगत सुरूज़ के अरघ दिहला के बाद बरत के समापन भइल

आस्था के महापर्व छठ बिहार के सगे  देश के कई राज्यन  में मनावल जाला । ई परब मंगलवार के नहाय -खाय के संगे  शुरू भइल आउर  बुधवार को खरना मनावल गइल । गुरुवार को अस्ताचलगामी मने डूबत सुरूज़ के अर्घ्य दियाइल, फेर  शुक्रवार के  उगत सुरूज़  के अरघ दिहला के बाद बरत के समापन भइल । सांध्यकालीन अर्घ्य देवे के समय शाम को 6.08 बजे के रहल । एह परब मे बरती सभे तीसरे दिन डूबत सुरूज़ के आउर चउथे आ अंतिम दिने  उगत सुरूज़ के अरघ देवेलन  । पहिलका दिने ‘नहाय-खाय’…

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खोरी मे

हिन्दी हिन्दी उहो क़हत हौ हिन्दी गाई खोरी मे । कबले बनी राष्ट्र के भाषा कबों सुनाई खोरी मे ॥ भाषा विकास के कूल्हि रूपिया भेंट चढ़ाईं खोरी मे ॥ हिन्दी ला बस काम करी ना बात बनाई खोरी मे ॥ उत्तर से दक्खिन के जतरा घूम रहल बा खोरी मे । पोता रहल बा करिखा सगरों फेसबुकियाई खोरी मे ॥ आपन काम बनावे खातिर बात बनाई खोरी मे । झूठ मूठ के करिया उज्जर मत फैलाईं खोरी मे । मलाई वाली कुरसी खातिर गैंग बनाई खोरी मे । थेथरई…

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मन उमगाइल

बहिना के बा मन उमगाइल, राखी के परवान भइया नेहिया से अनजान ॥ खोरी – खोरी बाटे डेराइल निनियो के बा चैन हेराइल गाँव शहर सुनसान बज़रिआ, सत्ता के अभिमान भइया नेहिया से अनजान ॥ बहिना के खोईंछा बा खाली रखिहा हमरे मुँहवा के लाली अन धन ना रूपिया चाही , दीहा नेह सनमान भइया नेहिया से अनजान ॥ सगुन दिनवा राह निहारेली नेह क डोर हथवे बान्हेली हहरि असीसिहें नइहरवा, रोजही साँझ बिहान भइया नेहिया से अनजान ॥ दुधही नहाया, पूतहीं फरिहा बहिना क थाती नेह सरिहरिहा तहरी किरती…

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