होलिका फुंकले क का फायदा

‘ ए बचवा! एना पारी होलिका जी क मूर्तिया ना आई का हो।परसाल त एतना सु्ग्घर मूर्ती रहल कि देख के जियरा जुड़ा गयल।होलिका माता केतना सुग्घर लगत रहलीं। उनके गोदी में बइठल उनकर लाल क सोना नियन मुंह देख के अपने टीटुआ क याद आ गयल रहे।’ बेकहला फुआ कॉलोनी के मोड़ पर होलिका बदे लकड़ी सहिरावत लइकन से पूछत रहलिन कि नन्हकू बिच्चे में कूद गइलन-
‘ए फुआ होलिका कब ले माता हो गइलिन हो।जानत हऊ न कि ऊ के रहलीं ..।’अबहीं नन्हकू फुआ क जनरल नॉलेज टेस्ट कइले चाहत रहलन कि फुआ डंडा लहरावे लगलीं।
‘ए मुंहफुकना!कहीलां न कि हमसे जिन अझुरायल कर नाही त एहि डंटा से एतना मारब कि छनभर में मनीकनिका चहुँप जइबे,जनले कि ना।’ बेकहला फुआ जरती आग हो गयल रहलीं।
‘ए भइया भाग जा इँहा से नाही त कुल ग्यान होलिका में हवन हो जाई।जनते हउआ ई जब कमिटमेंट कय लेवे लीं त अपने आप क भी ना सुने लीं।’ एगो लइका नन्हकू के आँख मार के बेकहला फुआ क सरनाम ‘मरकही’ सुभाव ओरी इशारा कइलस बाकिर नन्हकू ना मनलन।
‘ ए फुआ भले दू-चार गोजी मार ला बाकिर आज त तोहसे होलिका क कहनिया सुनिए के मानब।मोर फुआ न, देखा सुना दा। ए कुल नयका लयिकनो के भी जानकारी हो जाई।’नन्हकू के मीठ-मधुर निहोरा से फुआ फूल के कुप्पा हो गइलीं-
‘ई बात ह त सुना जा ए बचवा।होलिका माता सती-साबित्री मेहरारू रहलीं।ससुरे-नइहर सबकर एतना सेवा टहल करें कि सब उनसे बहुते खुस रहे बाकिर एक दिन उनके हंसिए-हंसी में छोटकी ननदी अछरंग लगा देहलस कि भउजी अपनी लइका नियन हमहन क मान-जान ना करे लीं।ढ़ेर आपन-आन करेलीं।बस्स एतने सुनत ऊ सानी-गुमानी मेहरारू जरती आग में लइका गोदी में लिहले कूद गईल अउर सत्ती हो गयल।’ बेकहला फुआ क कहनी सुन के सब दांत भींच के हंसे लगल।
‘ई त तोहरे जिनगी क कहनिया ह फुआ फरक बस एतना ह कि ऊ कूद के सत्ती हो गइलीं अउर तू ससुरे से बहरिया देवल गइलू।एना पारी तुंही काहे ना एहि होलिका में नन्हकू भइया के लेके बइठ जात हऊ..आंय।’ एगो लइका फुआ के चिढ़ावत चलल भाग।
‘ चला फुआ त सुना भइलीं।अब तोहन लोग सुनावा जा होलिका क कहानी।’नन्हकू क बतकुच्चन से मन ना भरल रहे बाकिर केहू कहनी सुनावे के तइयार ना भयल।
‘ए भइया तू खलिहर हउआ।तू ही कहनी सुना-सुनावा।हमहन के त बस इहे पता ह कि कुल लकड़ी, खर -पतवार बीन के रखे क ह अउर मुहूरत होते सम्भत फूंक देवे के ह।का करेके जान के कि के केके लेके फूंके बइठल ह अउर के फुंकात ह।’ एगो लइका नन्हकू से पीछा छोड़ावत कहलस।
‘बतावा भला तोहन लोग के पते ना ह कि काहें होलिका-दहन होला ।अरे ए भइया लोग एतना त जान ला कि होलिका बुराई के नाश बदे जलावल जाला।होलिका पापी हिरण्यकश्यप क बहिन रहलीं अउर भक्त प्रह्लाद क बुआ।अउरी..।’ नन्हकू सुर धइले बोलल चलल जात रहलन अउर लइका लोग धीरे-धीरे सरकत।अक्केले बेकहला फुआ बच गइलीं।
‘ए बचवा काहें बकलोली बतियावत हउवा।एक्के बेरी में होलिका जर-मर गयल होतीं अउर बुराई क नास हो गयल होत त का हर सलिए उनके फूंके के पड़त।हम त कहत हईं ऊ सत्ति माई रहलीं…।’फुआ बकबकात रहलीं अउर नन्हकू बाउर जस उनके ताकत रहलन।

  • सुमन सिंह

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