हे नारी तोहार केतना रूप

दुआर ओसार कुल साफ हो जायेके चाही , बाबू संझवे से सबके बिगड़त हउए । तनिको कही कसर ना रहे के चाही , बतायै देत हई । अबही हम स्कूले जात हई, देखी त मनेजर साहब काहे के बोलवले हउए । जब अपने घरे काम रहेला त बहरवौ अकाज पड़ल रहेला। अच्छा सुनत हउ कि ना हे भागवान , तोही से कहत हई । तनि बेटी के समझाय दिहा। माई बेचारी त गाय नियर ह। जवन बाबु कहि दें,  होखे के चाही । आज

दिदिया के देखै बदे लइका वाले आवै के हउए। दिदिया त केहूँ के समने ना पड़त हीय, न जाने कहाँ लुकाइल हउए ।

घरे मे सब अइसन दौड़त ह जइसे कवनो तीज -त्योहार मे हडबड़ी रहेले । सन्दुकी मे से कुल थरिया गिलास क जोड़ा निकाल के धो पोछ के मीनवा सरिया देहले बा । बाबा अवतै मिठाई क डिब्बा माई के देके, समझावै लगनै । देखा जल जलपान अच्छे से भेजवाया। देखा हमनी के इज्जत क सवाल हउए । उ लोग त कहत रहनै ह कि हम चुप्पे से लइकी देख लेब लेकिन हम कह दिहनी ह कि अपनो मान मरजाद ह, तू हमरे घरे आवा बेटी पसन्द होखी त तोहार नही त हमार हईये बा। बिटिया पसन्द बा तोहार आज से हमार भइल  , दिदिया के देख के पवहारी बाबा कहे लगनै । बड़ धुमधाम से दिदिया क बियाह हो गईल , लेकिन दिदिया महतारी ना बन पउलै। डाक्टर लोग कहैन कि ई कबहू माई ना बन पायी । माई बाबू के उपर त बज्र गिर गइल। उधर जीजा यानि पाहुन दिदिया के चोरी आपन दुसर बियाह कयी लेहनै। कुछ दिन बाद नयकी दुलहिन के गाँवै पर छोड्के। दिदिया के इहा अईनै। दिदिया कहलै कि जब बियाह कइ लेहला त ओके उँहा काहे छोड़ले हउआ। ओहू के यही लियावा। पाहुन त बड़ा खुश भइनै उ दिदिया के सुभाव जानत रहनै कि दिदिया के लाख तकलीफ रहे लेकिन वोकरे बजह से केहू के दुःख ना होखै। नयकी दुलहिन भी बड़ी सुघर रहनी।

एकदम दिदिया क टू कापी। लेकिन नयका अवतै दिदिया के तजना देवै शुरू कइनी । दिदिया आ जीजा त ओकरे हाथे क खेलौना हो गइनै ।उ जवन कहै उहे होखे लागल। दिदिया दिन पर दिन अपनही मे सिमटत चलल जात रहनी । लेकिन कबहूँ केहू से कुछ ना कहै , सारा अत्यचार सहत जाय। दिदिया क दसा देखके एगो रिस्तेदार उनकर मास्टरी मे नौकरी लगवा देहने । अब त नयकी  क अत्याचार अउर बढ़  गइल ।रोज के किच किच से पाहुन परेशान होके चोरी – चोरी नशा क सुई लेवै लगनै । इ बात से नयकी  आ  दिदिया दूनो अन्जान रहनी। पाहुन के शरीर मे पुरा जहर फइल गयल । हास्पीटल ले जइले कउनो फायदा ना भयल जीजा दुनिया से विदा हो गइनै। नयकी  अउर दिदिया दूनो किरिया करम बदे गाँवे अइनी। तेरही के दिने पता चलल इ नयकी  के गरभ बा। नयकी  के त कउनो सहारा ना। दिदिया जब कुल बीतले पर गाँवे से चलै लगल त नयकी  से कहलै चला हमरे साथे चला । नयकी  पीछे पीछे चल दिहनी। कुछ दिन बाद नयकी  के बेटवा भयल । दिदिया पुरे मन से नयकी  के बेटवा के अपने  बेटवा नीयर  पालन पोषण करै लगल । समय पखेरु के नियर उड़ गयल। बेटवा दूनो माईन के बीच ….?। कबहू ओके लगबै ना कइलै कि ओकरे बाप ना ह। आज नील बड़ा भारी अफसर हो गयल हउए। ओकर आज बियाह बा,  स्टेज पर जब दूनो माई बर बधू के आशिरवाद देवै पहुचनी ,  तब पुरा उपसि्थत समाज क आखँ भर आइल। सबके मुँहे से इहै निकलल कि हे नारी तोहार केतना रूप ।।

– डॉ ऋचा सिंह

 

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