हम हेरीं आपन गौरैया

चीं चीं अब ना करS चिरइया

हम हेरीं आपन गौरैया ॥

 

घर क अँगना

दुवरा मड़इया

ओरी बड़ेरी

कुइयाँ ठइयाँ

नाही फुदकत ता ता थइया ॥

हम हेरीं आपन गौरैया ॥

 

बिनी बटोरी

खर पतवार

सगरों हेरत

पहिला प्यार

नाही मटकत घर अंगनइया ॥

हम हेरीं आपन गौरैया ॥

 

चुहुल करत

लइकन के संगे

उड़त कबौं

जगाई उमंगे

मिलत नइखे घरहीं गवइया ॥

हम हेरीं आपन गौरैया ॥

 

नन्हका नन्हकी

के भरमावत

उपरि हाथ

कइके बोलावत

ठुनकत देखी लेत बलइया ॥

हम हेरीं आपन गौरैया ॥

 

रीत क रिस्ता

प्रीत क नाता

मन के गीत

न कतों गवाता

सून भइल सभ ताल तलइया ॥

हम हेरीं आपन गौरैया ॥

 

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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