सोहर

घर घर बाजेला बधइया,
कि कृष्ण जी जनम लेले हो,
अरे लाला मथुरा के
दिनवा बहुरि गईले,
नंद घरे सोहर हो।
 
धन्य धन्य बाबा बसुदेव,
जे सब गुन आगर हो,
अरे मईया धन-धन,
देवकी दुलारी, जे
जनली दामोदर हो।
 
पहिले पाहिल पांव परसेली,
जमुना जुड़ा गईली हो,
ललना मधुर मधुर,
मुसुकईलन, मुरली मनोहर हो ।
  • संजय कुमार चतुर्वेदी

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