सब बदल गईल बा

हर लोग बदल गईल बा
व्यवहार बदल गईल बा,
नईखे बांचल मेलमिलाप
हर राज बदल गईल बा।।
धोखा से भरल हर रास्ता
छल से भरल हर रात,
अन्हार लउके दिन में
अंजोर भईल हर रात।।
हर शब्द बिखर गईल बा
हर छन्द बिखर गईल बा,
कतहीं मेल ना लउके यार
हर गीत बदल गईल बा।।
खान बदलल पान बदलल
रहे के दलान बदल गईल बा,
मान बदलल जहान बदलल
सब अरमान बदल गईल बा।।
नीति बदल गईल बा
राजनीति बदल गईल बा,
आंगन के स्वरुप बदलल
बाबू के जोड़ल भीत बदल गईल बा।।
  • देवेन्द्र कुमार राय
(ग्राम +पो०-जमुआँव, पीरो, भोजपुर, बिहार )

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One Thought to “सब बदल गईल बा

  1. हरेश्वर राय

    हर लोग बदल गईल बा
    व्यवहार बदल गईल बा,
    नईखे बांचल मेलमिलाप
    हर राज बदल गईल बा।।
    रचना समसामयिक बिया. बदलत समाज के बेजोड़ आ दमदार चित्रण कविता के काफी गंभीर बना देले बा. एकर कवनों जोड़ नइखे.रचनाकार के हमरा ओर से बहुत बहुत बधाई.

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