सजन धीरे- धीरे……..

कुम्हलाइल बा देहिया सजन पोरे-पोर

आके मरहम लगा जा सजन थोरे-थोर

देखले बानी हम जब से हेराइल बा होश

हीया चिहुंकेला जब हम उठी ले भोरे-भोर

हो गइल बा तब से ई लब मोर खामोश

लाल से दूध अइसन भइल ठोर-ठोर

मानवा नाचेला सोंची कब लेत आगोश

देख बदरी के वनवा मे नाचे मोरे-मोर

लालसा लाल के लागल बा द तू पूरा

नेहिया अइसे तू जोड़ दिखे डोरे-डोर

लाल बिहारी मनाई कतनों माने ना दिल

झुलसे विरहा में हमरो बदन पोरे-पोर

आके मरहम लगा जा……….

 

  • लाल बिहारी लाल

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One Thought to “सजन धीरे- धीरे……..

  1. P p gupta( प्रयाग प्रसाद गुप्ता)

    सुंदर और सरल जीवन के लिए उपहार है चरित्रवान जीवन

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