शुक्रवार के उगत सुरूज़ के अरघ दिहला के बाद बरत के समापन भइल

आस्था के महापर्व छठ बिहार के सगे  देश के कई राज्यन  में मनावल जाला । ई परब मंगलवार के नहाय -खाय के संगे  शुरू भइल आउर  बुधवार को खरना मनावल गइल । गुरुवार को अस्ताचलगामी मने डूबत सुरूज़ के अर्घ्य दियाइल, फेर  शुक्रवार के  उगत सुरूज़  के अरघ दिहला के बाद बरत के समापन भइल । सांध्यकालीन अर्घ्य देवे के समय शाम को 6.08 बजे के रहल ।

एह परब मे बरती सभे तीसरे दिन डूबत सुरूज़ के आउर चउथे आ अंतिम दिने  उगत सुरूज़ के अरघ देवेलन  । पहिलका दिने ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनावल जाला ,जवने मे  बरती लोग नहाय के  पारंपरिक पकवान तइयार करेलन । दूसरका  दिन के  ‘खरना’ कहल  जाला , जब बरती लोग भर दिन बारात रहेलन , जवन सुरूज़ के  डूबले के संगे खतम हो जाला । ओकरे बाद वे माटी से बनल चूल्हा  पर ‘खीर’ आउर रोटी बनावे लन, जवना के  बाद में परसाद के रूप मे बांटल जाला ।

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