शक्ति के ही त नाम नारी ह

ई धरती पर सब इन्सान चाहे पुरुष होखे चाहे ऊ महिला होखे आपन जन्म के अधिकार के साथ अपना के विकास करे के चाहे आपन सपना पूरा करे के सबके बराबर के समानधिकार त होए के ही चाही पर 21वी शताब्दी जहवा इन्सान चाँद पर पर पहुंच गईल बा है बकिये औरत के प्रति सोच समाज के आजो संक़ीर्ण बा ।आजो ई पुरुष प्रधान समाज में नारी के साथ ओकर लौगिंक आधार पर भेद..भाव करल जायें ला औउरी ओकरा के शारीरिक रुप से कमजोर समझ के हेय दृष्टि से देखल जायला और हर क्षेत्र में ओकरा साथे शारिरिक और मानसिक शोषण करल जायला । काहे त ऊ नारी ह ऊ पुरूष से कबों बराबरी ना कर सके ले । आजो ई समकुचीत धारणा हमार नयका समाज में कायम बा । काहे न ऊ नारी क़तनो सबल ,सक्षम चाहे क्षमतावान काहे न होखे ओकरा के ‘ख ‘ वर्ग में ही समझल जायेंला ।पूरा दुनिया के अईसन ढेरे जगह बा औउरी ढेरे क्षेत्र बा जहाँ ओकरा भूमिका कॊ नजरअंदाज करल जायला ।आजो एगो औरत के खाली एहिला ना बढ़ल दियल जयला काहे की ऊ औरत हिय । अब ढेर भयल इंतज़ार की कोनो मसीहा आई औउरी नारी के सही मायने में संरक्षक बनी !हम नारी लोगन के आपन भीतर की छिपील शक्ति के आपने पहचाने के पड़ी औउरी आपने अस्तित्व के रक्षा अपने करे के पड़ी । अगर नारी के सब क्षेत्र में आगे बढे .के बा त ओकरा अपना के सब क्षेत्र में अपना के शत प्रतिशत साबित करे के पड़ी । दोसरा से चाहे पुरूष से आस करे के बजाये आपन बदौलत आगे बढ़ कर प्रयत्न करे के पड़ी ।सबसे नीमन बात तब होइ जब नारी नारी मिल जाए त ऊ शक्ति बन सके ले औउरी आपन मुट्ठी में ई दुनिया के कैद कर सके ले । कोमल हो सकनी बकिये कमज़ोर नईखी , शक्ति के नाम ही त नारी ह , शिष्टी कॊ जन्म देवे वाली मौत भी हमरा से हारल बा , त्याग की मूर्ति ,वात्सल्य की प्रतिमा , मेरे बलिदान के किस्सो की गवाही आजो बा ई दुनिया । कोमल हो ……………………..! सतियों के नाम पर हमरा के जलायल गयल , मीरा के नाम पर ज़हर पिलायाल गयल , सीता के नाम पर अग्निपरीक्षा बनायाल गयल , कबों द्रौपदी बनके त कबो अहिल्या बन आजो हमरा पर हर जुल्मों सितम जारी बा ! कोमल………………………….! हम चाह ली त हवा का मुख मोड़ दी , अगर जिदद पर उतर जाई त धरती कॊ नभ से जोड़ दी , लक्ष्मी ,सरस्वती चंडिके ,भद्रकाली ,कपालिनी , लाख रुप ह हमार , चले ला हमरे दम पर ई सब जग ..संसार , शक्ति के नाम ही त नारी ह !

 

 

  • पूजा गुप्ता “नेपाल “

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