विरह गीत

आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले
पिया अचके समुंदर के झाग भइले

का बताईं कि केतना दरद बाटे दिल
लागे सूना सजनवा के बिना महफ़िल
कब उचरिहें बँडेरी के काग भइले
आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले
पिया अचके समुंदर के झाग भइले ।।

काहें कइलऽ कपट तू कन्हैया कहऽ
काहें मनवा चोराके भोरवले रहऽ
राग मधुबन के काहें विराग भइले
आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले
पिया अचके समुंदर के झाग भइले ।।

कहिया अइब बता दऽ तिथि वार दिन
लेके आइब सुगंधित सुमन बिन-बिन
हिया आवन के असरे पराग भइले
आधी रतिया सेजरिया से भाग गइले
पिया अचके समुंदर के झाग भइले ।।

  • कन्हैया प्रसाद रसिक

Related posts

Leave a Comment