लोक गीत

न जा, न जा न जा न जा न
विदेश हो सजन।
अपने नदिया किनारे बाटै,
खेत हो सजन।
 
तोहसे अलुवा बोवईबै-
संघवा-संघवा निरईबै।
तोहसे मर्चा बैठैईबै,
संघवा-संघवा तोड़ैईबै।
तोहै देबै हम खेतवा-
खेमटाव हो सजन।
 
न जा,न जा न जा न जा न
विदेश हो सजन।
 
न जा,न जा न जा-
दिल्ली बम्बई,
न जा रेनूकोट हो।
खेतिया जो करबा रजऊ,
होई लहालोट हो।
मिली जाई गांधी छपवा कै,
नोट हो सजन।
 
न जा,न जा न जा न जा न,
विदेश हो सजन।
 
जब चईती कटी हो-
मेला नवमी लगी।
देवी-देवता के पूजै-
खातिर साड़ी लगी।
तोहसे मंगबै झूलनिया-
कै सेट हो सजन।
 
न जा ,न जा न जा न जा न
विदेश हो सजन।
 
तोहै पुड़िया खियईबै,
ताहर गोड़वा दबईबै।
हर पुन्नवासी के –
सजन पूजा करईबै।
करबै ,दुईगो लरिकवन-
कै सेट हो सजन।
 
न जा ,न जा न जा न जा न
विदेश हो सजन।
अपने नदिया किनारे बाटै,
खेत हो सजन।
  • उमाशंकर शुक्ल’दर्पण’

Related posts

Leave a Comment