मौसम आ चमगादड़

टेसू फुलवा का खिलल,
लागल बन में आग।
तितिकी ना धूआँ उठल,
जरल जीव हतभाग।

मौसम अस गरुआह बा,
उजरल टाटी बाड़।
पछिया हवा ओसार में,
उलिछे धूर कबाड़।

बनखंडी निर्जन भयद,
सूखल तरुवर डार।
बादुरकुल उलुटे लटक,
साधत बामाचार।

दिन में लागस जोगिया,
अति अबोध अबिकार।
होते रात अन्हार में,
बधिकन के सरदार।

धुआ सरिस लवले रहस,
घोंचू भद बदनाम।
जसहीं धरस चपेट में,
चिमट चबावस चाम।

  • दिनेश पाण्डेय

Related posts

Leave a Comment