मैना

सँझिए त हँसत चैन नींनि सुतलू,
रोवत भइल काहें भोर हो?
के तोर खोंतवा उजारल ए मैना,
कइके करेजवा कठोर हो?

फुदुकत रहलू तू बाबा अंगनइया,
भइया से करत टिसाही।
माई की अँखिया की पुतरी के जोती,
अर्हवल के कइलू ना, नाहीं।
लीपि- पोती अंगना, बिहान- साँझि चिक्कन,
कइलू तू घरवा अँजोर हो।

छनहीं में दउरि दुअरवा की गइया के,
अवरू बछरूआ के सानी।
छनहीं भतीजवा के दूध- भात खोरवा,
छनहीं में बाबा के पानी।
रात- दिन टहल बजवलू, ना थकलू,
कइलू ना मन कबो थोर हो।

घोड़वा चढ़ल अइलें सुन्नर कुमरवा,
बुझलें दरदिया ना पीर हो।
डोलिया चढ़ाइ, फुसिलाइ लेइ भगलें,
लागल करेजवा में चीर हो।
अंगना के रोपल तुलसी उखरि गइली,
दोसर अंगनवाँ में ठौर हो।

इहे ह बिधान मैना, इहे तोर करमे,
इहे ह जगतवा के रीत।
अपने मेंटाके मरजाद राखे दोसरा के,
मैना तबहुँ गावे गीत।
हीत- मीत, नात- गोत, दुनियाँ बदलि गइल,
नयना से ढरकेला लोर हो।

  • संगीत सुभाष

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