“माई माईए होखेले

“माई माईए होखेले , केतनहुं बड़ हो जा , कुछु क ल , भले जग काहे ना जीत ल लेकिन ओकर नज़र में तू बच्चा ही रहब, ओकर फिकर करे के आदत कबहुं ना जाला” :- रमेश इ सब बात सोचत-सोचत तेज़ी से घर के तरफ बढ़लन । रात के नौ बजत रहे आ उ अभी ले शहर में ही कवनो काम में उलझल रहलन । माई के फोन आइल रहे कहत रहली
“आव घरे हम तोहार उपाय लगावतानी , तू नू साफा बिगड़ गईल बाड़ । भला हेतना रात ले कवन काम होला ”
“माई उ तनी कुछ पुरनका दोस्त वोस्त मिल गईल रहल हउव सन त रोक लेल ह सन आव तानी जल्दिए आवतानी” :- रमेश तनीएक सफाई देहलन लेकिन ओपर माई अउरी भड़क गईली गुस्सा से कहे लगली
“तोहार दोस्त यार नू सब फालतुवे बाड़ सन , भला हेतना रात ले बाहर रहल जाला घर में ओकनी सन के गारजियन नईखे का..?”
फिर थोड़ा देर रूक के
” भले जेतना लेट हो जाई लेकिन धीरे-धीरे अइह , घबरा के गाड़ी तेज ना चलइह”
“ठीक बा माई” :- रमेश घरे बाईक से निकल गईलन
शहर से घर 25 किलोमीटर के दूरी पर बा,, रमेश इहे सोचत-सोचत घरे पहुंच गइले कि माई केतना फिकिर करेले “अरे हम 23 साल के हो गईल बानी,शादी बियाह के उमर हो गईल बा..नौकरी भी लागे ही वाला बा..तनी मनी ऐने ओने हो जाला त माई अभी भी एगो पांच साल के लइका खानी डांटेली, अब हम बुरबको त नईखी.. पर माई के के समझाई.. अरे तनी मनी लेट हो गइनी ह त का हो गइल…अउरियो लोग त घर से बाहर रहेला ,,बाहर रह के काम करेला..पढ़ाई करेला ओकर माई त एतना परेशान ना होली; चाहे होखत भी होईंये अब हमरा का पता..अब सब केहू त हमार माई ना ह जे आपन बेटा के दूर रहला पर आपन बेचैनी के देखा पइहे.. पर हमरा माई के देख के त लागेला कि उहो परेशान होखत होईये शायद”
रमेश के सही-सलामत घरे पहुंच गइल देख के माई के जान में जान आईल;उनकर बेचैनी शांत भईल
“माई,तू त हमरा के मारे के कहत रलू ह, का भईल”  :- रमेश हंस के माई से पूछले

“हं त पीटेम ना,तू नू सही में बहक गइल बाड़”  :-माई के हाथ में बेना रहे ओही से दू तीन बेर रमेश के देह पर ठेका देली
“माई, हमरा त तनियको चोट ना लागल ह” :- रमेश हंस के जब इ बात माई से कहले त माईयो हंसे लगली
रमेश सोचे लगलन कि माई केतना फिकिर करेली अपना बेटा के, शायद उ सोच भी ना सकेले ओतना.

-‘साहिल’ चम्पारणी

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