मड़ई

उड़े जिन आन्ही में पकड़ले बानी मड़ई
दइबो हँसत होई देख ई दबंगई। उड़े—

मड़ई उड़त हम धइ के बचवलीं
जिनगी धरब कइसे उड़े जइसे पतई।

हवा पानी अगिया से केतना लड़ब हम
मड़ई का संगही उड़त देखीं मनई।

मड़ई जगत उपलब्धि हउए अपनी
मुअतो का बेर न छोड़त बने मड़ई ।

  • आनन्द संधिदूत

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