मजदूर दिवस

बनी गईलन मजदूर हो जब भइलन सनेहिया से दूर हो।
चिरई बोले से पहीले काम निपटा के चली भइले खेतवा के ओर हो।।जब……….।।

चार रोटी संगे बाटे मिरिचा पियाज हो,
कालह तरकारी बनीं लागल मन में आस हो,
खेतवा के देखी-देखी चमकेला अँखिया के लोर हो।।जब……………।।

लइकन के चहक से मनवा बिहसेला
सगरी थकान तनिके में भाग जायेला
इनके से बाटे सारा जिनगी अंजोर हो।। जब…………।।

छोटकी मड़ईया महल अस लागे
मेहरी के बतिया कोयल जस लागे
बंधल बा पीरितिया के डोर हो ।।जब…………।।

खुरपी-कुदाल हऊवे इनकर संगतिया
रतिया ना कटे फदेला हमरी छतिया
भीजी जाला अंचरा के कोर हो।।जब…………।।

 

  • डॉ रजनी रंजन , घाटशिला , झारखंड

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