बेटा बेचा गइल

समधी जी हम रउआ गोड़ पो पगरी राखत बानी हमरा बेटी के अपना लिहीं , भोला हाथ जोड़के अपना होखेवाला समधी के आगे गिड़गिड़ाये लगलन। देखीं हमरा के समधी मत कहीं अभी शादी नईखे भइल त इ नाता कइसन दीनदयाल रोब में बोललन।फिर हाथ जोड़के भोला कहलन , शदिया तऽ होइये नु जाई राउर कृपा के खाली जरूरत बा।देखीं जवन तय बा तवन तिलक चढ़े से पहिले किलियर कर दिहीं हम कहाँ कहत बानी कि शादी ना होई दीनदयाल कहलन।
देखीं हम बहुत फेरा में अभी बानी पइसा के कवनो इंतजाम नइखे हो पावत आ महाजन से करजा लेबे के मन भइल तऽ पाँच रूपेया सैकड़ा महीना के सूद मांगत बा , सभ कामिनी तऽ सूदिये में चल जाई तऽ बाल बच्चा के कइसे खिआइब ।आशा रहे कि एह साल के फसल बेचके लइकी के शादी धूमधाम से करब बाकी दइब के दुआर बंद हो गइल । फसल देखके जवन खुशी उजियार होत रहे उ खुशी उधिआ गइल अइसन मोका पर पानी के लाला पड़ गइल कि गला के साथे साथे नाला भी सुखा गइल। फिर भी हम कहत बानी रउआ के पाई पाई चुका देब तनि मोहलत दिहीं ।
तऽ ठीक बा जब फसल बढ़िया होई तबहीं शादी करब अभी का जल्दी बा ? मोंछ पो ताव देके दीनदयाल कहलन।अबहीं त राउर लइकी बीए के परीक्षा देले बिया ओकरा के आगे पढ़ई लिखाई एमबीए करवाईं ।तले फसलो ठीक हो जाई हम कहाँ कहतानी कि रउआ घरे शादी ना करब, जब जबान दे देले बानी त पीछे ना हटब। बाकि हमरो मजबूरी समझीं लइका के पढ़ावे में हम बुका गइल बानी , रावा त जनते बानी शादी बिआह में केतना खर्चा होला आ उपर महंगाई के मार । छुछबेहरा लेखा शादी ना नु होई लइका विदेशी कंपनी में मनेजर बा त शादियो में पता चले के नु चाहीं।आपन आ अपना लइका के बडाई के पुल बाँधे में दीनदयाल तनिको ओज ना कइलन, आ उनकर गोड़ जमीन पर ना रहे।

 

दु दिन पहिले एगो पाटी आइल रहे लइकी डाकडर रहे आ अंगरेजी त अइसन बोलत रहे कि सुनके अंगरेज लो शरमा जाय। बापो आच्छा खासा कमात रहन अब रिटायर हो गइल बाड़न बाकी लइकी खातिर पइसा सहेज के रखले बाड़न।अपने मने बीस लाख आ एगो बड़की गाड़ी देबे के सकरले बाड़न आ इहो कहलन कि कम होई त कहब । उनकर त मुँह खुलबे ना कइल उ एतने कहलन कि देखीं हमरा सुनर सुभेख संस्कारी लइकी चाहीं अवरू कुछ ना।एह पर उहो हमारा बात के समर्थन कइलन आ इहो कहलन कि जवन लइकी के नेवरतक निकाल देले बानी उ त लइकिये के नु देबे के बा , आ हमरा के का कमी बा शादी अइसन करे के बा कि लोग इयाद राखी।

 

बाकि इ बात दीनदयाल भोला से ना कहलन काहें से कि पहिलहीं जबान दे देले रहन आ उपर से गाँव जवार सभके पता बा कि दुनो जाना कवलेज के टाइम से ही दोस्त हवें जा , एह शादी के दीनदयाल तुर दीहें त काफी बदनामी होइत एहीसे पइसा के पेंच लगाके कसहुँ चाहत रहलें कि भोले अपने से कगरिया जास।

एने भोला के बेटी विमला के बीए के रिजल्ट निकलल त पुरा विश्वविद्यालय में टाॅप कइले रहली , खुशी से भोला रोवे लगलन आ इहो मन में सोचस कि जवान लइकी के पढ़ाइओ पुरा हो गइल अब घर में बइठावल ठीक नइखे हाथ पियर हो जाइत त गंगा नहा लेतीं। भोला सीधा साधा गाँव में रहेवाला लइकी से नोकरी करवावे के पक्ष में ना रहले। कहत रहन कि शादी के बाद जवन मन करे तवन करीहे पहीले ना । लइकी के पढ़ाई के बारे में गाँव जवार में खूब चर्चा होत हे , आ काहें ना होई पहिला बार कवनो अपना जिला के लइकी विश्वविद्यालय में टाॅप कइले बिआ। विमला के आगे पढ़े के त बहुत मन करत रहे बाकी बाबूजी के हालात देखके कुछ कह ना पावत रही। बीए तक त पढ़ाई में कवनो खर्चा ना लागल फिस माफ रहे आ उपर से छात्रवृतियो मिलत रहे । कबो कबो सोचस कि लइकन के टिउसन पढ़ाके आपन आगे के पढ़ाई जारी राखीं बाकि हिम्मत ना परत रहे बाबूजी से कहे के।

 

एक दिन के बात ह जवना केलेज में विमला पढ़त रही ओह मे एमबीए के भी पढ़ई शुरू होखे जात रहे त कालेज के प्रिंसिपल खुद भोला से मिले आइल रहन , प्रिंसिपल साहेब के देखके विमला समझ ना पवली कि काहें खातिर आइल बानी उ जनली कि बधाई देबे खातिर आइल होखब आ के प्रिंसिपल साहेब के पैर छुवली त उहाँके विमला सिर पो हाथ धके आशीर्वाद देनी आ कहनी , भोला भाई इ लइकी हमरा के दे द। भोला बात के समझ ना पवलन आ कहलन , दे द का रउरे लइकी बिया अबले त रउए रहे आगहुँ से रउरे बिया । हम त खाली जनमवले बानी बाकि जिनिगी त रउए बनवले बानी एह नाते हमरा से बढ़के रावा बानी।
भोला इ समझत रहन कि प्रिंसिपल साहेब के कवनो लइका होई एह से विमला के हाथ मांगे आइल बानी , काहें से कि खाली पेटे पुरनमासी का चान भी रोटी लागेला ।भोला के खुशी के ठेकाना ना भइल अइसन बुझात रहे कि उनका के भगवान मिल गइल बाड़न कहलन जवन राउर मरजी आ आपन हाथ जोड़ देलन।

प्रिंसिपल साहेब कहलन कि एह लइकी के आगे के पढ़ाई के जिम्मा हम लेत बानी। इ बात सुनके भोला के चढ़ल भड़ेहर उतर गइल आ रोवे लगलन, कहलन कि काहें रउआ हमारा से मजाक करत बानी हमार अइसन हालत नइखे कि बबुनी के आगे पढ़ाईं। प्रिंसिपल साहेब उठके भोला के गला लगा लेलन आ कहलन , रउआ कहत रहीं नु कि विमला हमरो बेटी हिय त अब काहें रउआ संदेह होता । भोला के लोर ओरात ना रहे कहे चहलन कि का करीं हम कहाँ से पढ़ावे के खर्चा लाइब असो त दइबो दगा दे देले बाड़न ना त बबुनी के हाथ ना पियर क देतीं। ना भोला भाई ना बबुनी के अबहीं शादी मत करीं लइकी गुनगर बिया ओकरा के पढ़े दीं । आ हम एकरा के फिर से अपने कवलेज में लेत बानी आगे इ एमबीए करीहें आ हाँ सभ पढ़ई के खर्चा कालेज के तरफ से एकरा बाद छात्रवृतियो इनका के दियाई। बस रउआ हँ कर दीं सभ बेवस्था हम क देले बानी। ओने विमला सुनली कि उनकर एडमिसन एमबीए में होता त बहुत खुश होके भगवान के फोटो के पास जाके रोवे लगली।

भोला के आँख डबडबिया गइल कहल रावा हमरा खातिर भगवान बनके आइल बानी जवन रउआ बुझाय करीं हमरा विसवास बा रावा गलत कबहुँ ना करब। एतना कहके भोंकार पारके भोला रोवे लगलन। प्रिंसिपल साहेब चुप करवलें आ बिटिया से कहलें कि बबुनी काल्ह कवलेज में आ जइह तोहार दाखिला खातिर। विमला प्रिंसिपल सहेब के गोड़ छूके आशीर्वाद लेली।

एने प्रिंसिपल साहेब विमला के भब्य फोटो के साथ गेट पो लिखवा देलन कि एमबीए में पहिला दाखिला विश्वविद्यालय टाॅप के भइल बा , एकर नतिजा इ भइल कि निमन निमन कवलेज ताकते रह गइल आ विमला के कवलेज पहिलहीं भर गइल । प्रिंसिपल साहेब भी अपना वादा पो खरा उतरलन एको पइसा ना लागल विमला के एमबीए करे में साथे साथे एगो बड़का कंपनी में उनकर कैंपस सेलेक्सन भी हो गइल।

जसहीं उनकर रिजल्ट निकली ओह कंपनी में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर आसीन हो जइहें । भोला जब इ खबर सुनलन त दुनो हाथ उपर उठाके जोर से चिलइन तुहीं सभ कुछ बाड़ आ कह के रोवे लगलन। उनका अपना संघतिया के बात इयाद आ गइल कहले रहन कि “उनकर लइका मनेजर बा असहीं कइसे शादी कर दीं।”

जब बबुनी के एमबीए में दाखिला हो गइल त भोला दीनदयाल से शादी के मना कर देले कहले कि अभी बिटिया के बियाह ना करब , ओकरा आगे पढ़े के विचार बा। एह पो दीनदयाल ताना भी कसले रहलें , “चेट में पइसा ना आ चानी के बेपारी” कह के बड़ी खुश भइल रहलें चल बलाय टर गइल अब त समाज ना नु कही कि दीनदयाल अपना जबान से हट गइलें , मने मने बीस लाख आ बड़की गाड़ी के भंजावे लगले। दीनदयाल के लइका के तिलक चढ़ेके दिन आ गइल भोला के भी तिलक में बोलवले रहन ताकि देख लेस भोला एगो मनेजर लइका के शादी केंग होला। एह बात के भोला भी समझत रहन फिर भी हँसके दीनदयाल के बधाई देलन।

 

शादी हो गइल आ कनिया घरे आ गइल ना कवनो परदा ना कवनो लेहाज जिंस पैंट आ टाॅप में कनिया जब घर में घुसल त सभके मुँह बवा गइल सभे एक दोसरा के मुँह ताके लागल । दीनदयाल अपना लइका के फरका बोलाके कहलें इ का ह बाबू इज्जत लेहाज सब घोर के पी गइल बिया का, का बाबूजी रउओ पढ़ल लिखल होके गँवार जइसन बात करतानी जबाना कहाँ से कहाँ चल गइल आ रउआ घूँघट आ आँचर में ही बन्हाइल बानी। एतना बात अपना लइका के मुँह से जब दीनानाथ सुनलन त अइसन लागल जइसे कपार पो बज्जर गिर गइल होखे । अगिला दिन कनिया के साथे बबुआ चल देलन माई बाबुजी के करेज छछनत रह गइल बहुरिया से गोड़ छुवाके आशीर्वाद देबे खातिर। दीनदयाल के इ पता ना रहे कि लइकी अकेले संतान बिया अपना माई बाप के , पइसा के आगे आन्हर हो गइल रहलें।उनका पता ना चलल कि पइसा पर  अपना लइका के बेंच देले बानी आ बेंचल माल कबो वापस ना होला।

आज विमला के नौकरी लगला के खुशी में प्रिंसिपल साहेब अपना कवलेज में भब्य पार्टी के आयोजन कइले बाड़े एकर दुगो उद्देश्य रहे विमला के सम्मान देहल आ ओहू से बढ़के कवलेज के प्रचार। दीनदयाल आ भोला दुनो जाना मेहमान रहन जा आ जब आमने सामने भइलें जा त भोला हाथ जोड़के अभिवादन कइलें, दीनदयाल कवनो जबाब ना दे पवले उनका उ ताना इयाद आ गइल कि “चेट में पइसा ना आ चानी के बेपारी” बाकि आज उनका अइसन लागत रहे जइसे भोला कहत होखस कि ” चेट में पइसा आ इज्जत उघारी ।

  • कन्हैया प्रसाद तिवारी रसिक

 

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