बारिश के दिन

बारिश के दिन आइल बा।
सूखल पात हेराइल बा।

गौना बरात के दिन बीतल
बैंड आ बाजा चुपाइल बा।

नाव चलवले मे कागज के
लरीका सब मनुआइल बा।

छत पर अब ऊ ना आवेली
छतरी के दिन आइल बा।

बदरे करेलं आंख मिचौनी
इयाद केहू के आइल बा।

रहल किसान सूखा से चिंतित
बाढ से अब अफनाइल बा।

नाचे लगलं मोर मोरनी
जब से बरखा आइल बा।

धान के रोपनी होखे लागल
खेत मे गीत सुनाइल बा।

बीछला के गिर गइलं मंगरु
पूरा बदन चोटाइल बा।

ये ही मे दारु पी के कलुआ
ललुआ से अझुराइल बा।

बारिश अइले के आगम मे
“खेतान” के छान छवाइल बा।

  • जगदीश खेतान

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