बाबा बउरहवा क बनारस बचल रही

‘ ए गुरु देखला ह न कलकत्ता में कइसे ओभरब्रिजवा अरराय के गिर पड़ल।टिविया में देखते दिमाग सुन्न पड़ गयल रहे हमार त।बतावा भाय अइसे भला काल आवेल।कहत हईं कि घोर कलजुग नाचत ह।जहंवे देखा उंहवे नासे नास।का होई ए भोलेनाथ अब केहुवे ना बची का।’ नन्हकू चहकत-बमकत अड़ी के बतरस में आन्ही-पानी नियन कूद पड़लन।
‘ ए नन्हकू भइया ! तू साँचो में कलकत्ता वालन क दुःख में दुखी हउवा कि अपने चिंता में दुबरात हउआ ई बतावा.. आंय।बनरसो में त ओभरब्रिज बनते न ह।डेरा जिन कवनो दिन ओहितरे चपा- ओपा जइबा त मरबा ना मुक्त हो जइबा।तू ही न कहेला कि इ काशी मोक्ष क नगरी ह ।अपने कहलका भुला जात हउआ ।बतावा भला महाकाल के नगरी में रह के काल से डेरात हउआ आंय।’ पप्पू नन्हकू के कान्ही के थपड़िआवत चिकारी कइलन।
‘ रोजे कहीं न कहीं केहू मूअत-जीयत ह।सीमा से लिहले रजधानी ले हाहाकार मचल ह।एकाध धंटा बदे टीबी लगा के तनी देख ला लोग, कहत हईं ब्लड प्रेशर ना बढ़ जायी त कहिहा।ससुरन के बस खबर भेटाए के चाही।दिनवा भर एक्के बतिया फेंट-फेंट के मरिहन कि जियल पतन कर दिहन स।इ त साह जी क चाय ह अउर कतवारू पहलवान क ठंढई कि करेजा तर रहेला नाही त ई न्यूज़ चैनल वालन क बस चले त अदिमि के मधुरे-मधुर आंच में झँऊस दें कुल।’ एक जाना परेसानी क कसैली कुटकुटात कहलन।
‘ जवन भयल कलकत्ता में तवन हमहन नियन अदिमी से त देख ना जायी।तोहन लोग एकदम कठकरेज हो गयल हउवा लोग।केहू से कवनो मतलबे ना।अरे,एह काशी में त बऊरहवो बाबा क मान-जान होला अउर ऊ पूजालन।केतना अदिमि मर गइलन,केतना घवाहिल पड़ल तड़फत हउअन।केतना अबही ओही मलबा तरे दबायल होइहन।हे भोलेनाथ! अब तोँही सहाय होखा प्रभू। ‘नन्हकू एक बार फिर कपार ध के बइठ गईल रहलन।
‘ एं ! ई बऊरहवा बाबा कहवाँ हउवन भाई।हमके त ना पता ह।’ साह जी के अचरज क चिहुंकी आवे लगल।
‘ ला चाय बेचत-बेचत एहि बनारस में बूढ़ा गइला अउर बऊरहवा बाबा कहाँ हउवन इ जनबे ना करेला।अरे उहे चौकाघाट पर एगो छोटहन मंदिर ह लाल रंग में रंगल।हमार बाबा-आजा से भी पहिले के जमाना क।सब कहेला बड़ा जगता हउवन।वइसे त सबकर भला करेलन बाकिर कब्बो -कब्बो जब पापियन के पाप से खुनुसा जालन त ओही पुलिया से लोका देवेलन।कुल पाप बरूणा जी अपने पेटे में समवा लेवे लीं।’ नन्हकू क ज्ञान चक्षु खुल गयल रहे अउर सबे भौचक होके ताकत रहल बाकिर गुरु मने मन मुस्कियात रहलन।
‘ ए बचवा ! ई त बहुते बढ़िया जानकारी ह।कुल समस्या क हल।अब जवन कलकत्ता में भयल ऊ त बहुते तकलीफ़ क बात ह बाकिर हमहन के बनारस में अइसन ना होई।कुल भ्रस्ट-पापी ठेकेदारन अउर इंजीनियर लोगन के बऊरहवे बाबा पार लगा दीहन।ढ़ेर घबरइले क जरूरत ना ह।ओइसहूँ अइसन कुल दुर्घटना प दू तीन दिन लोग अफ़सोस करे लं फिर भुला जालन।हमरे देश क याददाश्त बड़ा खराब होत जात ह हो।एह भुलयिनी क चिंता करे के ह त करा लोग….।’

  • डॉ सुमन सिंह

वाराणसी

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