प्यार, परिवार, बोझ

देख सतीश तोरा के समझा दे तानी ते आज के बाद हमारा और हमारा मोहब्बत के बारे मे कुछ भी कहलीस तS हमारा से बुरा केहु ना होई। ई तेवर सोनु के देख के तS अजबे महसूस भईल हमनी सब मित्र सन के। ई बात तब के हS जब हम, मनीष, अमरजीत, इरसाद, दीपक, बिजेन्दर सब मित्र कालेज के प्रांगन मे बईठ के हँसी मजाक करत रनी सन। सतीस सोनु के गर्लफेंड के बारे मे मजाक कS देले रहे। ई बात पर सोनु सतीस से दु-तीन हफ्ता तक बात ना कईले रहे। ऊ दिन हमनी के सोनु के ई व्यवहार देख के हमनी के चक्कित रनी सन। ई सोनु आज एगो लईकी के प्यार के चलते आपन सबसे जीगरी दोस्त से नफरत प उतारु हो गइल बा। ई बहुत ही गंभीर मामला बुझात रहे। धिरे धिरे अब मालुम चलल रहे की ई सोनु उ लईकी सोनम से प्यार करेला और बहुत ही जल्दी दुनु घर से भाग के शादी अपना मर्जी से करे वाला बारे सन। ई बात सुन के हमनी के पुरा मित्र मिल के सोनु के समझईनी सन पर सोनु प कवनो असर ना रहे यहाँ तक कि सोनु के सबसे करीबी मित्र विकाश आ सदाम,निरंजन भी समझावे मे नकाम साबित भईले सन। एक दिन के बात हS की सोनु आ सोनम घर से भाग के दिल्ली जा पहुँच ले सन। सोनु तS एगो परीक्षा बा ई बहाना कके भागल रहे लेकिन सोनम बीना बतावलSही भागल रहे। सोनु के घर के लोग जानत रहे कि बबुआ परीक्षा देवे गईल बा। सोनम के दु दिन हो गईल रहे घर से भगला घर के लोग चींता मे डुबल रहे और जाके थाना मे अपहरण के केस दर्ज करा देले रहे। पुलिस मोबाईंल ट्रेकीन के जरीये पकड़े के कोशीश कईलस लेकिन ई दुनु पुराना सिम के तोड़ के फेंक देले रलेसन और नया नम्मबर केहु के कानो कान खबर ना होखे देलन सन। दु चार दिन बितला के बाद दुनु कोर्ट-मैरेज कS लेलन सन। शादी के बाद दुनु आपन हँसी-खुशी जीवन बितावे लगलेसन। गाँव जवार के लोग भी दिल्ली कमाये खातिर गईल रहे तS गाँव के एक आदमी सोनु के आ सोनम के दिल्ली के बुद्धा पार्क मे देखलस तS ओकरा कुछ शक भईल ऊ आपना घरे फोन कके पत्ता कईलस तS पत्ता चलल कि सोनु 5 महीना से परीक्षा के बहाना और सोनम दुनु लपाता बारेसन। ऊ आदमी अपना घर प बाता देलस की सोनम के तS माँग मे सेन्दुर भरल बा ई दुनु ईहा वियाह कS लेले बारेसन। ई बात गाँव मे लुती नियन फईल गईल की फलनवा के बेटा आ फलनवा के बेटी भाग के शादी कS लेले बारेसन। अब का, दुनु परिवार के लोग आपन इज्जत के बचावे ला अब बात के आगे ना बढ़े देवे के चाहल। ऊ दुनु आपना परिवार ला मर गईला के समान हो गईल रलेसन। सोनम के परिवार आ सोनु के परिवार से बतीस के आकरा चले लागल। दुनु परिवार एक दुसरा के दुश्मन बन गईल रलेसन। आज पाँच साल बित गईल बा। हम दिल्ली एगो कवि सम्मेलन मे भाग लेवे पहुचल रनी। हमके सोनु एका एक एगो चाय के दोकान पर चाय पियत भेटा गईल अब ऊ सोनु ना रहल रहे पहीले लेखान। जींस, टिर्सट, आखँ मे चस्मा, आ पैर मे जुता के जगह मईला कुच्चैला पैजमा कुरता, आखँ अंदर परे धसँल, पैर के चपल चार जगह सिवावल। सोनु हमके देख के नजर चोरावत रहे लेकिन हम ओकरा के पहचान गईनी। जल्दी जल्दी चाय के कप रख के भागे के फिराक मे रहे लेकिन पिछे से हम ओकर कपड़ा पकर के खिंच लेनी। सोनु शर्म से लाल हो गईल। हम बोलनी- ई का सोनु ते हमके पहचान गईलीस फिर भी मुहँ छिपा के भागत बारीस, आ ई तोर का दासा हो गईल बा रे। सोनु बोललस- का कही यार। ई बात कह के हमारा हे लिपट के रोवे लागल। हमके समझ मे आ गईल रहे की सोनु के उपर कवनों भारी मोसीबत आ गईल बा। हम बोलली- बोल ना का भईल बा। ई कहके ओकर आखँ से आँसु पोछत ओकरा के अकेला मे हाथ पकड़ के ले गईनी। आज हम आपन एगो दोस्त के जीवन केकन तबाह भईल ऊ बात सुन के हमारा आत्मा के बहुत ही दु:ख पहुँचल। सोनु के पत्नी सोनम आज से एक साल पहिले टेम्पु दुर्घटना मे एगो पैर टुट गईल आ ओकरा दावा बिरो मे सोनु के नौकरी से लेके पैसा कउरी सब डाक्टर के घरे चल गईल। आ एतना मँहगाई मे रूम किराया प, हर चीज खरीद के खाए के रहे। सोनम अभी भी एक पैर के विकलांग बन के जीवन जीया तीया, सोनु के दुगो छोट-छोट बेटा भी बारे सन। अब सोनु सोनम के छोड़ भी ना सकत रहे। और ई दुनु प्राणी अब परिवार से भी कवन मुँह लेके मदद मंगतन। सोनु के जीवन बोझ बन गईल रहे। आ अब परिवार के चलावे खातिर सोनु के मजदुरी करे के परत रहे। सोनु ई मोसिबत मे अकेला रहे केहु आपन – बेगाना ना रहे। ऐकर जिम्मादार सोनु खुद रहे जे सब से नाता रिस्ता तोड़के अकेला जीवन बितावे चलल रहे। हम अब ई घड़ी मे सोनु के कुछ आर्थीक मदद देके भरोसा देनी की भगवान प भरोसा कर सब ठिक हो जाई। एक तरफ मन करत रहे कि आज हम आपन भरास निकाल ली व्यंग्य बोल के लेकिन सोनु के मजबुर दिन के आगे हम मजबुर हो गईनी। दिल्ली से वापस आके सिधा सोनु के दुअरा गईनी, सोनु के बाबूजी आ माई दुअरा खटीया पर बईठल रहे लोग। जब ई समाचार सुनाईनी तS सोनु के बाबूजी गुस्सा से बोलले- छोड़ मर जाए दS ओकरा के, ओकर नाम से हमारा जलन होला। पर सोनु के माई कपार प हाथ रख के रोवे लगली। हम सोनु के बाबूजी के समझाईनी की अब जवन हो गईल उ हो गईल। अब सोनु के एगो परिवार हो गईल बा। ओकर दुगो छोट छोट बेटा हो गईल बारेसन, आ रउवा लोग ई समय मे सोनु के मदद के बहुत जरुरत बा। सोनु बोझ से पुरा टुट गईल बा। इस सब कह के हम उहा से चल देनी। काल सुबेरे सोनु के बाबूजी हमरा घरे आईल रहे हमारा से सोनु के मोबाईल नम्बर माँगे। कहत रले की कालहु वैशाली ट्रेन के टिकट करावे जा तानी दिल्ली जाए खातिर।

  • जियाउल हक

जैतपुर सारण

 

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