पियSकड़वा यार

हमार गाँव के तीन यार रले। सुखन मियाँ,  रुबिन मियाँ , साधु पासवान। तीनो मे बहुत दोस्ती रहे। तीनो एके साथ ईटा पाथे चेमनी पर जा सन और एके साथे ईटा पाथ के चेमनी के पथेरी से वापस आवसन। अगर कवनों दोस्त के ईटा पाथे मे देरी हो जाए तS तीनो एक दुसरा के मदद कके जल्दी जल्दी एके साथे ईटा पाथ के चट्टी पर पहुँचत रले सन। जब तीनो यार चट्टी से वापस पैदल आवसन तS केहु माई के लाल ना रहे जे ऐ ई तीनो से बतीया लेव। ई तीनो के पैर लड़खरात चले। सुध से आवाज ना निकले मुँह से। तीनो यार के गाँव के लोग एगो नामे रख देले रहे पियकड़वा यार। तीनो दारू पियाला के बाद खुब नटंकी करSसन। कवनों निशा मे नाली मे गिरे तS, कवनों के लुंगी खुले खुले हो जाऐ। ई तीनो के मेहरारु भी परेशान हो गईल रलीसन। जब आवे मे देर होखे तS एकनी के बाल बच्चा समझ जाए कि आज गाड़ी गरम आई। कभी कभी तS तीनो कही रस्ते मे ढ़िमला जा सन तS गाँव के केहु केहु देखे तS उठा के लियावे ना तS आके ओकनी के घरे खबर दे देवे। एक दिन के बात हS कि तीनो पिके वापस आवत रलेसन। सुखन मियाँ रास्ते मे कही ढ़िमला गईल रले और ई रुबिन मियाँ और साधु पासवान दुनु एगो रास्ता मे पोखरा पड़त रहे ओही मे नाहाये खातिर गईलेसन तब तक साधु पासवान ज्यादा पियले रहे ऊ पोखरा मे डुबे लागल।साधु पासवान के बाचाए गईले रुबिन मियाँ दुनु के दुनु डुबे लगले सन। शाम के समय मे केहु देखल ना सुबरे लोग देखलस कि दुनु के लाश पोखरा मे दहात रहे। पुरा गाँव मे हलचल हो गईल। तीनो के घरे रोवन पिटन पर गईल। दुगो के तS लाश मिल गईल एगो कहा बा लोग खोजे लागल तS एक जगे रास्ता मे पटाईल मिलले सुखन मियाँ। जब सुखन मियाँ सुनले के अइसन बात बा तS खुब रोवले। अब लागे की मित्र के बिछड़ला के शोक मे पागल टाईप के हो गईल बारे। अब तS कामो करे ना जास दिन रात पिके रोवस और अर- बर बकस कि हमारा के छोड़ के कहा गईलसन रे यारवा, तहनी बिना अब चिखनवो ठिक ना लागे रे यारवा। सुखन मियाँ के घर के लोग भी समझ गईल रहे कि ई हो अब ढ़ेर दिन के मेहमान नईखन। जल्दीये मर जईहे। पर एगो एइसन हमारा हिया बाहार आईल कि पुरा राज्य मे दारू शराब बन्द हो गईल। गाँव के सभे ई फैसला से खुश रहे दु आदमी के छोड़ के एगो बेचे वाला एगो पिये वाला। लेकिन कुछ दिन बाद शराब बंदी के फायदा लोग के आँख लगे लउके लागल तS सभे खुश हो गईल रहे। सुखन मियाँ के भी कही दारू शराब भेटाए ना तS बेचारु पियल छोड़ के अच्छा से अब आकेला ही ईटा पाथे जास। बाकि सुखन मियाँ बराबर मायुस रहस। मायुस रहला के कारण कुछ लोग कहे कि दारू नईखे मिलत तS एही से उदास रहS तारे। तS कुछ लोग कहे कि इनकर यार लोग के याद आवता।  आज हमारा राज्य मे शराब-बन्दी के प्रति  लोग मानव-श्रंख्ला बनावले रहे। सभे लोग एक -दुसरा के हाथ पकड़ के कुछ दुर तक खाड़ा रहे। हमु शामिल होखे गईल रनी लाईन मे सब से अंतीम आदमी के देख के हम हैरान रनी ऊ आदमी सुखन मियाँ रले। हम अब सीधा सुखन मियाँ लS पहुँचनी तS देख के हैरान रनी सुखन मियाँ के आँख से आँसु निकल रहे और एगो हाथ लाईन मे लागल लोग से मिलईले रले आ एगो हाथ एहीगन खाली बाहर निकलले रले। हम जाके सोचनी की सुखन मियाँ के खलीका हाथ पकड़ ली तS सुखन मियाँ हमरा के माना कके कहले की हमारा हई हाथ आके पकड़ ले। ई हाथ हम आपन दुनु यार सन खातिर बाहर निकलले बानी ना जाने कब आके ई हाथ पकSड़ीहन सन ऊ। एतना कह के सुखन मियाँ के आँख से कुछ आज ज्यादा ही आँसु निकले लागल। हम दुसरा ओर जाके एगो उनकर हाथ पकड़ के खाड़ा हो गईनी।

जियाउल हक।

जैतपुर सारण।

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