पियार के समुंदर के अरारी पर

एगो समुंदर के अरारी पर बइठल

लहर के देखनी

अपने ओरी आवत

ढेर नीमन बुझाइल ओकर छुवन

लागल जइसे ई तहरे बा छुवन

एकदमे तहार

पहिले नीयर

तहरों के इयाद बा का

साँस

मन के भाव

सुघर मिठकी बोल

इहवाँ से तनि बालू के देखा

केतना सुघर बा
चारो ओरी फइलल
नवहन के सपना लेखा
हमनी के त बूढ़ा गइनी
बाकि पानी आउर असमान अजुवो जस के तस बा
लहर त बेर बेर बहरे आवता
फेर समुंदर मे लउट जाता

तहार इयादो ओइसे बा
बाकि तू त हमरा के जाए के कहतारा
हमरे जान
जब हम चारो ओरी देखेनी
हमरा के पियार के समुंदर अरारी से
चारो ओरी बस पियार के समुंदर देखाला
बाकि तहरा खाति
ई असमान
ई धरती
ई चनरमा
ई तरई के कवनों माने बा का ?
समुंदर के लहर कुछ कहतिया
पियार के सबद
तू आपन धड़कन सुना
आउर बतावा
तहरा के का सुनाता ।

  • मूल रचना (Beach of love) – कल्पना भट्ट

भोजपुरी भावानुवाद – जयशंकर प्रसाद द्विवेदी  29/12/2017

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